हिमखबर डेस्क
पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेल सेवा को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करने वाली केंद्र सरकार के दावे हर बार झूठे साबित हुए हैं। चुनाव आने पर नेताओं को हिमाचल की रेल याद आती है, लेकिन चुनाव होते ही फिर भूल जाते हैं।
इस समय पठानकोट से जोगिंद्रनगर की रेलवे लाइन बिलकुल तैयार है। ट्रायल भी सफल रहे हैं पर जनता को परेशान किया जा रहा है। रेल सेवा प्रभावित होने से जनजीवन प्रभावित हो गया है।
अभी तक पठानकोट-जोगिंद्रनगर ट्रैक पर सिर्फ दो गाडिय़ां पपरोला से कांगड़ा तथा एक बैजनाथ -पपरोला से जोगिंद्रनगर के बीच चल रही है।
ऐसे में कांगड़ा से पठानकोट की तरफ एक भी गाड़ी न चलने से लोगों में केंद्र सरकार के खिलाफ भारी रोष है। लोगों का कहना है कि डलहौजी मार्ग के पास चक्की खड्ड पर ध्वस्त रेलवे पुल का पुननिर्माण हो चुका है।
12 जनवरी को पुल पर इंजन से ट्रायल भी हो गया है। रेल विभाग ने 26 जनवरी से सभी रेलगाडिय़ां बहाल करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक कांगड़ा से पठानकोट तक रेल सेवा बहाल नहीं की गई है।
बैजनाथ से जोगिंंद्रनगर व पपरोला से कांगड़ा तक रेलगाडिय़ां चलना आरंभ हो गई हैं, लेकिन कांगड़ा से पठानकोट तक अभी तक रेल सेवा बहाल नहीं हुई है।
लोगों का कहना है कि जिस प्रदेश से सात-सात सांसद भाजपा के हों, वहां केंद्रीय प्रोजेक्ट अगर हांफ रहे है तो यह धोखा है। उनका कहना है कि चुनाव से ठीक पहले तो बड़े-बड़े ट्रकों-ट्रालों के डिब्बे लाकर ट्रेन चला दी गई और जीतने के बाद सब कुछ बंद।
लोकसभा सांसद उठाएं जनता की आवाज
रेलसेवा से सहारे प्रभावित लोगों ने इस बारे में कई बार केंद्र सरकार और रेलवे मंत्रालय से मांग की लेकिन हर बार निराशा ही हाथ लगी है।
उन्होंने जनभावनाओं का सम्मान करते हुए पठानकोट-जोगिंद्रनगर रेल सेवा को शीघ्र पुन: प्रारंभ करने के लिए सांसद राजीव भारद्वाज, राज्य सभा संसद सदस्य इंदु वाला गोस्वामी व सांसद कंगना रणौत से जनसमस्या को संसद में प्रभावी ढंग से उठाने का आग्रह किया है।
जनहित से जुड़ा मुद्दा
जनता का कहना है कि सरकार को इस मुद्दे को केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया के रूप में नहीं, बल्कि एक सामाजिक और जनहित के विषय के रूप में देखना चाहिए। यह केवल रेल सेवा बहाल करने का मामला नहीं, बल्कि लाखों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को सहज बनाने का प्रश्न है।
परेशान
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह रेललाइन का विद्यार्थी, कर्मचारी, छोटे व्यापारी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए इसी सस्ती और सुगम यात्रा का सहारा लेते हैं।
रेल चलने से पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
सामाजिक दृष्टि से भी यह रेल सेवा अत्यंत महत्त्वपूर्ण रही है। इसने वर्षों तक दूरदराज के गांवों को शहरों से जोड़े रखा, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर लोगों तक पहुंचे। यह रेल केवल यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक नहीं ले जाती, बल्कि रिश्तों, सांस्कृतियों और परंपराओं को भी जोड़ती है।
पर्यटन की दृष्टि से भी कांगड़ा घाटी देशभर में अपनी विशेष पहचान रखती है। यहां के धार्मिक स्थल, प्राकृतिक सौंदर्य और शांत वातावरण हर वर्ष सैकड़ों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। ऐसे में यह रेल सेवा पर्यटकों के लिए एक आकर्षण का केंद्र रही है। यदि इसे पुन: शुरू किया जाता है, तो पर्यटन उद्योग को नई गति मिलेगी।

