राज्य का मुख्यमंत्री चेहरा जातिवाद क्षेत्रवाद भाषावाद एवं परिवारवाद से हटकर तजुर्बेकार होना जरूरी

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व्यूरो रिपोर्ट

पूर्व पंचायत समिति सदस्य एवं वर्तमान उपप्रधान पंचायत डोल भटहेड़ साधू राम राणा ने प्रेस वार्ता में कहा कि हिमाचल चुनावों के उपरांत जो राजनीति दलों में मुख्यमंत्री बनने की जोर आजमाइश चल रही है. उसमें भाजपा में तो बाहरी तौर बहुमत मिलने पर जय राम का नाम ही सामने आ रहा है.

लेकिन कांग्रेस पार्टी में तो मुख्यमंत्री को लेकर इतने दावेदारों के नाम आज से पहले कभी भी किसी चुनाव के उपरांत देखने को नहीं मिले जितने नाम इस बार के चुनाव के उपरांत सुनने को मिल रहे हैं। अतः इससे मुख्यमंत्री बनने को लेकर गुटबाजी का माहौल कांग्रेस के नेताओं में दिखाई देने लगा है जोकि कांग्रेस पार्टी में एकजुटता को लेकर सही संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं.

क्योंकि मुख्यमंत्री बनने को लेकर लगभग आधा दर्जन नामों का मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल होना पार्टी में एकजुटता कम और गुटबाजी के कारण विघटनकारी घटनाओं की संभावनाएं अधिक बनी रहती हैं जिससे पार्टी सत्ता मिलने पर भी मजबूती की बजाय सहमे सहमे हालातों में काम करती है.

क्योंकि ऐसे हालातों में विपक्ष के बजाय सत्तापक्ष का विरोधी गुट ही विपक्ष की भूमिका में ही सरकार के काम काज पर नजर गाड़े रहता है. जिससे सत्तापक्ष खुलकर फैसले लेने के बजाय डर डर कर फैसले लेकर सरकार चलाने केलिए मजबूर हो जाता है।

अतः कांग्रेस पार्टी को बहुमत मिलने पर मुख्यमंत्री की बागडोर जातिवाद क्षेत्रवाद भाषावाद एवं परिवारवाद से हटकर किसी कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ तजुर्बेकार नेता को सौंपने पर एकजुटता का परिचय पुरानी पार्टी परंपरा के आधार पर ही लेना चाहिए ताकि सत्ता प्राप्ति उपरांत सरकार का संचालन एकजुटता एवं मजबूती से किया जा सके।

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