
नूरपुर- देवांश राजपूत
प्रदेश के विभिन्न जिलों में करीब एक लाख परिवार फोरलेन की विभिन्न परियोजनाओं के तहत प्रभवित हैं। इनके पुनर्वास व मुआवजे के प्रति सरकार का गत 4 साल में जो रवैया देखने को मिला है वह अत्यंत नकारात्मक व उदासीन तथा इन 1 लाख परिवारों को उजाड़ने वाला साबित हुआ है। यह आरोप फोरलेन मानवाधिकार लोक बॉडी के अध्यक्ष राजेश पठानिया ने कंडवाल में आयोजित अपने संगठन की एक बैठक में लगाए।
उन्होंने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया कि वह केंद्र सरकार की मंशा व निर्देशों के विपरीत आचरण कर रही है जिसका परिणाम हाल ही के चुनाव परिणामों से भी साबित होता दिखा चुका है। उन्होंने प्रदेश सरकार को चेताते हुए कहा कि वह इन परिणामों से सबक लें तथा फोरलेन प्रभावितों से किए उन तमाम वायदों को पूरा करे जो कि उसने अपने राजनीतिक घोषणा पत्र में कर रखे हैं।
समिति के अध्यक्ष ने इस बात पर भी गहरा रंज व्यक्त किया कि फोरलेन प्रभावितों की समस्याओं को लेकर प्रदेश सरकार द्वारा करीब 3 माह पहले एक कमेटी का गठन किया गया था, लेकिन इतनी अवधि बीतने के बावजूद यह कमेटी अपनी एक भी बैठक नहीं आयोजित कर पाई। इस कमेटी ने समीपवर्ती प्रांतों में फोरलेन प्रभावितों को दिए गए मुआवजे को जांचना था, लेकिन 3 मंत्रियों पर आधारित यह कथित कमेटी यह जानकारी भी अभी तक नहीं जुटा पाई है।
यह जानकारी तो जिलाधीश स्तर पर भी ली जा सकती थी। जाहिर है कि सरकार ने एक लाख फोरलेन प्रभावितों को उसी प्रकार मूर्ख बनाने की ठान रखी है जिस प्रकार 3 साल पहले एक कैबिनेट मंत्री की अध्यक्षता में एक इसी प्रकार की समिति बनाई तथा वह समिति भी कुछ भी न कर सकी।
उन्होंने कहा कि सरकार एक लाख परिवारों की जिंदगी से न खेले तथा फोरलेन एक्ट 2013 को अक्षरश लागू करे। अन्यथा सरकार द्वारा कमेटियों का कथित गठन जैसी नौटंकियों को जनता में उजागर किया जाएगा तथा सरकार को इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ेगा।
इस बैठक में राज पठानिया, मंगल ठाकुर,कमल, मिथुन, हरदीप, तिलक, सुभाष, मनमोहन, कमलेश, पवन आदि द्वारा भाग लिया गया।
