भाजपा की टिकट पर भी नहीं मिला भाजपा कैडर का वोट।
हिमखबर डेस्क
पूर्व में हिमाचल विधानसभा में जिन तीन आजाद विधायकों का भाजपा ने राज्यसभा सीट पर वोट लेने उपरांत आजाद विधायकी से इस्तीफा दिलवाकर भाजपा में शामिल करने के उपरांत भाजपा की टिकट पर चुनाव तो लड़वाया, लेकिन भाजपा कैडर ने इन तीनों को वोट नहीं डाला।
जिसका जीता जागता उदाहरण इस बात का लगाया जा सकता है कि जितने वोट इन तीनों को आजाद के रूप में मिले थे, उतने ही वोट इनको भाजपा की टिकट पर चुनाव में खड़े होने पर मिले हैं जबकि कांग्रेस पार्टी के वोट बैंक में काफी मात्रा में इजाफा हुआ है।
राणा ने कहा कि हमीरपुर से भले ही भाजपा प्रत्याशी आशीष शर्मा जीत दर्ज करने में सफल हुए है लेकिन वोट प्रतिशत आशीष शर्मा का भी उतना ही रहा जितना आजाद उम्मीदवार के रूप में रहा था, जबकि कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार का वोट प्रतिशत हारने पर भी लगभग दुगना हो गया।
अतः आजाद विधायकों का भाजपा को राज्य सभा सीट जिताने उपरांत विधायकी छोड़कर भाजपा से चुनाव लड़ने पर मिले वोट प्रतिशत को देखते हुए यह यहीं कहा जा सकता है कि भाजपा द्वारा इन तीनों निर्दलीय विधायकों का अपने राजनीति हित में फायदा लेने उपरांत युज एंड थ्रो जैसा राजनीति व्यवहार करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है।

