चम्बा – भूषण गुरुंग
आज शनिवार के दिन 20 अप्रैल को थ्री फोर गोरखा राइफल के जवानों,जेसीओ, औऱ अधिकारीयो के द्वारा अपने कुल की देवी माँ संसारी जो कि सभी संसार के दुखों को हरती है। उनके दरवार में नत्मस्तक हुये। यूनिट के धर्म गुरु आर के पांडे जी के अगुबाई में अपने कुल की देवी माँ संसारी जी के मंदिर सुबह पुजा अर्चना के बाद हवन पूजन किया गया।
जिसमें पल्टन के एक्स मेजरअमन थापा ने विशेष रूप से भाग लिया। पंडित के धर्म गुरुजी के द्वाराअपने यूनिट के द्वारा माता को चुनरी उड़ाकर माँ के दरवार में चारो औऱ ध्वजारोहण किया गया और सभी यूनिट के सुख और समृद्धि के लिये माँ का आशिर्वाद लिया। उनके साथ स्थानीय महिलाओ ने भी विशेष रूप से पूजा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
इस मंदिर का निर्माण आज से 100 साल पहले उनके यूनिट के द्वारा किया गया था। तभी से यूनिट चतुर्थ गोरखा राईफल के पाचो यूनिट के जवान औऱ अधिकारी लोग हर वर्ष अप्रैल के महीने में अपने की कुल देवी औऱ अपने गुरु गोरखनाथ और सभी यूनिट की शक्ति की देवी माँ काली की पूजा अर्चना के लिये देश के किसी भी कोने में हो ज़रूर अपने अपने देवी देवताओं को पूजने के लिये बकलोह ज़रूर पहुचते है।
वही चिलामा स्थित गुरु गोरखनाथ जी के मंदिर में 2/4 और 4/4 जीआर के यूनिट के लोगो के द्वारा पूजाअर्चना की वही दूसरी औऱ बकलोह स्थित गुरु गोरखनाथ जी के मंदिर में 1/4 और 5/4 जीआर के द्वारा मंदिर में हवन पूजन किया गया। और बाबा जी को रोट का प्रसाद चढ़ाया गया हवन पूजन के बाद स्थानीय महिलाओं भजनकीर्तन किया गया। औऱ तीनो मंदिरों में लंगर का आयोजन किया गया था।
इस मौके में सभी यूनिट के धर्म गुरुओं ने अपने अपने यूनिट के लिये मनोकामना औऱ सुख समृद्धि की कामना की गई। थर्ड फोर गोरखा राईफल के धर्म गुरु आर के पांडे ने बताया ये सभी मन्दिर का निर्माण अपने अपने यूनिटों के द्वारा 1886 के बाद किया गया था। तभी से लेकर आज दिन तक सभी पाचो यूनिट के लोग हर साल इन मंदिरों माथा टेकने आते है और अपने युनिटो के लिये अपने गुरु ओर अपने कुल देवी का आशिर्बाद लेकर चले जाते हैं।
अन्तिम दो दिनों में सेंटर से बड़े अधिकारी आते हैं और माता कालीऔऱ 14 गोरखा राईफल सपाटू के द्वारा बनाया गया गुरु गोरखनाथ जी के मंदिर में पूजा अर्चना के बाद 23 तारिक को अपने यूनिटों में चले जाते है। कियो कि पहले कभी यहाँ पर चतुर्थ गोरखा राईफल का ट्रेनिंग सेंटर हुआ करता था। तभी पाचो यूनिटों के द्वारा अपने अपने देवी देवताओं के मंदिरों की स्थापना की गई थी। इस लिये पाचो यूनिटों के लिए अप्रैल का महीने पूजा के लिये खास महत्व रखता है।

