बस चलाते समय भूल जाएं झपकी लेना और मोबाइल फोन सुनना, चालकों की लापरवाही पकड़ेगा यह डिवाइस

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मंडी, नरेश कुमार

बस चलाते समय चालक ने कोई लापरवाही बरती तो बच नहीं पाएगा। मोबाइल फोन सुना, नींद की झपकी ली या एक हाथ से स्टीयरिंग पकड़ा तो उसे नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है। चालक पर जीके-99 डिवाइस नजर रखेगा।

ट्रांसपोर्ट कंपनी, स्कूल, कॉलेज प्रबंधन, परिवहन विभाग व पुलिस प्रशासन को डिवाइस फोटो व वीडियो के माध्यम से चालक की हर गतिविधि की जानकारी देगा। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) मंडी के शोधकर्ताओं के सहयोग से ऊना जिले के अम्ब की जवास्टिका सॉल्यूशन कंपनी ने हिम स्टार्टअप योजना के अंतर्गत जीके-99 डिवाइस विकसित किया है।

आइआइटी मंडी ने तकनीक विकसित करने के लिए जवास्टिका सॉल्यूशन कंपनी को 10 लाख रुपये का वित्तीय सहयोग दिया है। प्रदेश सरकार ने हिम स्टार्टअप योजना में आइआइटी मंडी को 10 करोड़ की ग्रांट दी है। डिवाइस से सड़क हादसों में कमी आएगी और चालक की कार्यशैली में सुधार होगा।

कैसे काम करेगा जीके-99 डिवाइस

डिवाइस बस के डैशबोर्ड पर फिट होगा। इसमें एक कैमरा लगा हुआ है जो चालक की लाइव तस्वीर डिवाइस के माध्यम से नियंत्रण कक्ष को प्रेषित करेगा। जीपीएस तकनीक से लैस डिवाइस में सिम कार्ड रहेगा।

चालक फोन कॉल करने या सुनने के लिए जैसे ही मोबाइल फोन हाथ में पकड़ेगा डिवाइस नियंत्रण कक्ष को अलर्ट एसएमएस व तस्वीरें भेजना शुरू कर देगा। नियंत्रण कक्ष से संबंधित जानकारी चालक के प्रबंधन को कुछ सेकंड के अंदर मिल जाएगी। परिचालक को फोन कर चालक को बस तुरंत रोकने के लिए कहा जाएगा।

नींद की झपकी ली तो बजेगा चेतावनी सायरन

बस चलाते समय अगर चालक को नींद की झपकी आ गई तो डिवाइस में लगा चेतावनी सायरन बज उठेगा। इससे चालक, सवारियां, परिचालक या फिर विद्यार्थी एकदम अलर्ट हो जाएंगे।

डिवाइस से छेड़छाड़ संभव नहीं

चालक डिवाइस से छेड़छाड़ नहीं कर पाएगा। कैमरे की दिशा बदलने या डिवाइस ऑफ करने की कोशिश की जानकारी भी तुरंत नियंत्रण कक्ष को मिलेगी।

डिवाइस में फिट रहेगा एल्को सेंसर

जीके-99 डिवाइस में एल्को सेंसर भी लगाया गया है। बस स्टार्ट करने से पहले चालक को एल्को सेंसर से एल्कोहल परीक्षण से गुजरना होगा। चालक ने अगर शराब पी रखी होगी तो इसकी रिपोर्ट भी डिवाइस के माध्यम से नियंत्रण कक्ष को मिलेगी।

30 हजार होगी डिवाइस की कीमत

जवास्टिका सॉल्यूशन कंपनी ऊना के एमडी दीपक कुमार का कहना है प्रदेश व देश में आए दिन सड़क हादसे में लोगों को जान गंवानी पड़ती है। स्कूल बसों के दुर्घटनाग्रस्त होने के मामले भी बढ़े हैं। ज्यादातर मामलों में चालकों की लापरवाही सामने आई है।

कांगड़ा जिले के नूरपुर स्कूल बस हादसे ने पूरी तरह झकझोर दिया था। इसी हादसे के बाद डिवाइस बनाने की योजना बनाई थी। आइआइटी मंडी के सहयोग से उम्मीदों को पंख लगे हैं। डिवाइस की कीमत 30,000 रुपये रहेगी।

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