प्री नर्सरी टीचर के 4700 पदों पर कैसेे होनी है भर्ती, जानिए…

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शिमला – जसपाल ठाकुर

प्री नर्सरी टीचर के लिए एनटीटी की भर्ती पर दिल्ली से जवाब आया है। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय के शिक्षा विभाग के सचिव ने राज्य सरकार के शिक्षा सचिव को आश्वस्त किया है कि एनटीटी कोर्स की मान्यता को लेकर पूरे देश में दिक्कत आ रही है। इसलिए एनसीटीई के भर्ती नियमों में आजकल के हिसाब से कुछ बदलाव करने की जरूरत है। इस बारे में केंद्र सरकार की कोई प्रक्रिया शुरू कर रही है।

इसलिए राज्यों को कुछ इंतजार करना चाहिए। इससे पहले राज्य सरकार के शिक्षा विभाग ने दिल्ली से एनटीटी के रिकाग्राइज्ड संस्थानों की सूची मांगी थी। जवाब के बाद ये उम्मीद दिखी है कि एनसीटीई के 2018 के भर्ती नियमों में बदलाव होगा।

इसमें दो साल के एनटीटी डिप्लोमा की बात की गई है, जबकि एक साल की अवधि के कोर्स वाले भी राज्य में मौजूद हैं। बहुत से राज्य इन नियमों के कारण उलझे हुए हैं। इनमें रिकॉग्राइज्ड संस्थानों की शर्त लगा रखी है और रिकोग्रिशन तब थी नहीं। कमोवेश यही स्थिति हिमाचल में भी थी।

इधर राज्य सरकार ने 4000 से ज्यादा स्कूलों में प्री नर्सरी की कक्षाएं शुरू कर दी हैं। इनमें 700 स्कूल और जोड़े जा रहे हैं। अब तक 55,000 बच्चों का एनरोलमेंट यहां हो चुका है, लेकिन इन्हें संभालने और पढ़ाने के लिए टीचर नहीं है।

वर्तमान में सरकार ने जेबीटी को ही ये काम दे रखा है, जबकि 2018 से अब तक जेबीटी की भर्ती तक नहीं हुई है। इसलिए शिक्षकों की कमी पहले से ही है। जेबीटी का केस कोर्ट में फंसे होने के कारण परेशानी बढ़ी है। ऐसे में प्री नर्सरी टीचर भर्ती में देरी से और उलझन बढ़ी है। प्री नर्सरी कक्षाएं अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति का हिस्सा हैं।

इसलिए ये राज्य सरकार को चलानी ही होंगी। हालांकि जब प्री नर्सरी की कक्षाएं सरकारी स्कूलों में पूर्व शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज के समय जोड़ी गई थीं, तब सरकारी स्कूलों में एनरोलमेंट बढ़ाना मुख्य लक्ष्य था। लेकिन अब ये नई शिक्षा नीति के कारण करना होगा।

ऐसे में अब सबकी नजरें प्री नर्सरी टीचर भर्ती पर हैं। इसके लिए समग्र शिक्षा अभियान ने बजट दे रखा है, लेकिन भर्ती नीति फाइनल नहीं हो पा रही।

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