
व्यूरो रिपोर्ट
पठानकोट-मंडी नेशनल हाइवे पर कोटला में करोड़ों की लागत से निर्मित पुल के पास विभाग द्वारा पिछले करीबन एक सप्ताह से जेसीबी लगाकर खुदाई करने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। विभागीय अधिकारी भी मौका पर मौजूद हैं तथा विभाग की ही जेसीबी खुदाई कर रही है लेकिन खुदाई क्यों की जा रही है, इसके बारे में कोई भी अधिकारी जबाब नहीं दे रहा है। पिछले एक सप्ताह से जेसीबी द्वारा खुदाई का कार्य चला हुआ है जिससे डंगों की नींव खोखली हो रही है, वहीं सरकारी पैसे का भी दुरुपयोग हो रहा है।
पुल के साथ ही एक तरफ़ डंगे के बाहर जबकि दूसरी तरफ़ डंगे के अंदर की खुदाई की गई है व मिट्टी के सड़क पर ही ढेर लगा दिए गए हैं जिससे सोमवार को वाहनों का जाम लगा रहा। गहरा गड्ढा होने से रात के समय भी कोई वाहन अनहोनी घटना का शिकार हो सकता है। पठानकोट-मंडी नेशनल हाइवे पर निर्मित करोड़ों की लागत से निर्मित यह पुल काफी अहम है क्योंकि इस पुल से रोजाना सैंकड़ों की तादाद में वाहन गुजरते हैं और नींव खोखली होने से भारी-भरकम वाहन के गुजरने से कोई भी अनहोनी घटना घटित हो सकती है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार विभाग द्वारा जेसीबी लगातार ठेकेदार द्वारा लगाए गए डंगों की पैमाइश की जा रही है कि नींव जमीन के अंदर कितनी गहरी है। अब सवाल उठता है कि पुल के डंगे निर्मित होने के समय कोई विभागीय कर्मचारी मौका पर नहीं था और अगर मौका पर था तो उसकी उस समय पैमाइश क्यों नहीं की गई। ठेकेदार का कहना है कि उसकी पुल निर्माण के बाद भी विभाग द्वारा पेमेंट नहीं दी जा रही है।
विभाग कहीं न कहीं अपनी नाकामी को छिपाने की कोशिश कर रहा है। बुद्धिजीवियों ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मांग की है कि कोटला पुल के पास विभागीय अधिकारियों द्वारा खुदाई करवाने की एवज में कार्रवाई अमल में लाई जाए, वहीं जेसीबी लगाकर सरकारी खजाने की चपत की भरपाई भी की जाए।
