निहत्थे ही आतंकियों से जा भिड़े थे जगदीश सिंह
चुवाडी – अंशुमन शर्मा
दो जनवरी की अलसुबह पठानकोट एयरबेस के मैस में जवानों के लिए नाश्ते की तैयारी चल रही थी। साथियों के साथ डिफेंस सिक्योरिटी कॉर्प के हवलदार जगदीश भी पास ही काम में जुटा था।
इसी बीच आतंकियों ने लाइट जलती देख मैस पर हमला बोला। डीएससी के तीन जवान आतंकियों की गोलियों का शिकार हो गए।
जब आतंकी वहा से भागने लगे तो हवलदार जगदीश सिंह ने बचने की बजाए अदम्य साहस का परिचय देते हुए उनका पीछा किया व एक आतंकी को दबोच लिया।
संघर्ष करने के बाद जगदीश ने आतंकी को उसी की असाल्ट राइफल छीन कर मार गिराया। इसके बाद जगदीश बाकी आतंकवादियों के पीछे दौड़े लेकिन उनकी गोली लगने से शहीद हो गए।
जगदीश सिंह के इस अदम्य साहस को देखते हुए उनके नाम पर कर्नाटक के एयरबेस हेडक्वार्टर में भवन का नाम शहिद जगदीश सिंह के नाम पर रखा गया है।
जगदीश सिंह की धर्मपत्नी स्नेहलता ने बताया कि भारत ने जो आज आतंकवाद के खिलाफ जो आज पाकिस्तान पर वार किया है। उससे दिल को थोडी राहत मिली है।
जब तक पाकिस्तान से आतंकवाद का पूर्ण रूप से खात्मा नहीं हो जाता तब तक उन शहीदों की आत्मा को शांति नहीं मिलेगी। उनका भारत सरकार से अपील की है कि पाकिस्तान में सभी आतंकवाद के ठीकाने नेस्तनाबूद कर दें।