
कांगड़ा, राजीव जसबाल
नगर परिषद कांगड़ा की बैठक में आज एक बार फिर सत्ता पक्ष व विपक्ष में खूब घमासान हुआ, जिसके नगर परिषद अध्यक्ष द्वारा बैठक को स्थगित कर दिया गया।
बैठक आरंभ होते ही विपक्ष की तरफ से पूर्व अध्यक्ष कोमल शर्मा ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि नगर परिषद की पिछली बैठक जो प्रस्ताव पास किए गए, उसमें से कुछ प्रस्ताव बदल दिए गए ओर कुछ हटा दिए गए। कोमल शर्मा ने कहा कि नगर परिषद की पिछली बैठक में जो भी प्रस्ताव पास हुए उनकी जानकरी उन्हें एक पार्षद होने के बाद आरटीआई के माध्यम से लेने पड़े।
उन्होंने कहा कि आज बैठक में जब उन्होंने कार्यकारी अधिकारी से पिछली बैठक के बारे में जानकारी लेनी चाही, तो वह भड़क गए और मीटिंग छोड़ कर हाल से बाहर चले गए। कार्यकारी अधिकारी का इस ररह से पार्षदों व अध्यक्ष का अपमान करके हाल से बाहर जाना निंदनीय है।
हालांकि मौजूदा अध्यक्ष ने उन्हें मीटिंग में आने को भी कहा, लेकिन वह नहीं आए, जिसके बाद सत्ता पक्ष के सभी पार्षद मीटिंग से बिना उन्हें कुछ बताए चले गए और वे मनोनीत पार्षद रितेश सोनी, विद्या सागर, सुरेश शर्मा व वार्ड एक के पार्षद प्रेम सागर, तीन की पार्षद पुष्पा चौंधरी चार की पार्षद अनुराधा वही इंतजार करते रहे। इस बारे कार्यकारी अधिकारी चमन लाल का कहना है कि कोमल शर्मा द्वारा लगाए गए आरोप गलत है।
उन्होंने किसी सवाल का जवाब देने से इनकार नहीं किया और बैठक में जो भी प्रस्ताव पास होते हैं, वे अध्यक्ष की सहमति से पास होते है, लेकिन आज की बैठक में कोमल शर्मा ने बैठक को शुरू हुई नहीं होने दिया और उनके द्वारा बैठक की गरिमा को ठेस पहुंचाई, जिसके बाद बैठक को बुधवार को स्थगित कर दिया गया।
इस बारे नगर परिषद अध्यक्ष रेणु शर्मा का कहना है कि अभी बैठक शुरू हुई थी कि विपक्ष द्वारा हला शुरू कर दिया गया ओर मीटिंग हाल में शोर मचाना करना शुरू कर दिया गया, जिसके बाद अपने पक्ष के पार्षद अशोक शर्मा, राज कुमारी, सुमन वर्मा, सौरभ के साथ मीटिंग हाल से बाहर आ गए और मीटिंग को स्थगित कर दिया गया।
बिना मतलब दो घंटे बैठाए रखा
नगर परिषद कांगड़ा के लिए मनोनीत पार्षद रितेश सोनी, सुरेश शर्मा व विद्यासागर ने कहा कि सरकार ने हमें लोगों की सेवा के लिए नियुक्त करके भेजा है, लेकिन आज जिस तरह से उन्हें बैठक में बेइज्जत किया गया।
बैठक में अनदेखी करने के साथ जब अध्यक्ष व उनके समर्थक पार्षद हाल से बाहर चले गए, तो उन्हें दो घंटे बिना मतलब से वहां बैठना पड़ा। पार्षद रितेश सोनी ने तो यहां तक कह दिया कि अगर इसी तरह नगर परिषद में चलता रहा, तो वे सरकार को पत्र लिख कर इस पद जोडऩे की बात करेंगे
