दो इंजीनियर और नायब तहसीलदार समेत 9 पर एफआईआर

--Advertisement--

Image

आरोप है कि इंजीनियरों ने नायब तहसीलदार, कानूनगो और दो पटवारियों के साथ मिलकर तीन चहेतों की संपत्तियों का सिर्फ कागजों में अधिग्रहण कर लाखों का अतिरिक्त मुआवजा दिला दिया।

शिमला, जसपाल ठाकुर

 

कुल्लू जिले की सैंज घाटी में पार्वती जल विद्युत परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान एक करोड़ से ज्यादा के मुआवजे के वितरण में गड़बड़ी के मामले में विजिलेंस ब्यूरो ने पीडब्ल्यूडी के दो तत्कालीन इंजीनियरों और एक नायब तहसीलदार समेत नौ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि इंजीनियरों ने नायब तहसीलदार, कानूनगो और दो पटवारियों के साथ मिलकर तीन चहेतों की संपत्तियों का सिर्फ कागजों में अधिग्रहण कर लाखों का अतिरिक्त मुआवजा दिला दिया।

मामले में शिकायत की प्रारंभिक जांच में साक्ष्य पाए जाने के बाद ब्यूरो ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साल 2005-06 में जल विद्युत परियोजना के लिए हिमाचल प्रदेश पीडब्ल्यूडी विभाग के जरिये जमीन का अधिग्रहण किया गया था। प्रोजेक्ट के निर्माण में आसानी के लिए एनएचपीसी ने पीडब्ल्यूडी की मदद से सैंज बाईपास का निर्माण करने के लिए स्थानीय लोगों की जमीन व मकानों का अधिग्रहण किया।

जांच में पाया गया कि बंजार उपमंडल के तत्कालीन सहायक अभियंता गोपाल चंद गुप्ता, कनिष्ठ अभियंता वीरेंद्र कुमार ने सैंज निवासी रोशन लाल, महेश शर्मा से मिलीभगत कर मकान मालिकों को अनुचित लाभ पहुंचाने की नीयत से मकान व जमीन को कागजों में अधिग्रहीत कर लिया। वास्तविक कब्जा नहीं लिया। मकानों में लगे बिजली मीटर भी कटवाने की प्रक्रिया शुरू नहीं की। अधिग्रहीत मकानों और जमीनों पर वास्तविक कब्जा व रिहाइश आरोपियों की बनी थी।

अधिग्रहण का मुआवजा बढ़ाने के लिए कोर्ट में आरोपियों की याचिका की सुनवाई के दौरान भी कोई आपत्ति नहीं की। यह भी पाया गया कि भूव्यवस्था के तत्कालीन पटवारी गोपाल चंद, पटवारी ठाकुर दास, कानूनगो हरबंस लाल और पीडब्लूडी मध्य खंड मंडी के भू अर्जन अधिकारी नायब तहसीलदार शिव राम ने भूमि मालिकों रोशन लाल, निक्का राम और मान दासी के बेटे महेश शर्मा के साथ मिलीभगत कर सड़क निर्माण के नाम पर अनावश्यक जमीन को चिह्नित कर अधिग्रहीत करा दिया।

--Advertisement--
--Advertisement--

Share post:

Subscribe

--Advertisement--

Popular

More like this
Related