
चम्बा- भूषण गुरुंग
दूसरों को नसीहत, खुद मियां फजीहत’ वाली कहावत मेडिकल कालेज चंबा के प्रबंधन पर बिल्कुल सटीक बैठती है। एक तरफ जहां कालेज प्रबंधन की ओर से कोविड से बचने के लिए शारीरिक दूरी के पालन का पाठ पढ़ाया जा रहा है वहीं प्रबंधन खुद इस नियम का पालन करना भूल गया है। मेडिकल कालेज में एक बेड पर दो-दो गर्भवती महिलाओं को भर्ती किया जा रहा है।
किसी महिला की कोख में बच्चा है तो किसी की गोद में। जच्चा-बच्चा वार्ड में गर्मी में एक बिस्तर पर दो-दो गर्भवती महिलाओं को लेटना किसी सजा से कम नहीं है। प्रसूता वार्ड में गर्भवती महिलाओं को बेड नहीं मिल रहे हैं। गर्भवती महिलाएं भटकने पर मजबूर हैं। इस सब का खामियाजा महिलाओं को बीमारियों के संक्रमण के तौर पर चुकाना पड़ रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से दिए गए निर्देशों के तहत मरीजों के बिस्तरों की दूरी कम से कम एक से दो मीटर होनी चाहिए, लेकिन यहां सारे नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बेड चाहिए तो सिफारिश हो
अस्पताल में डिलीवरी के लिए आने वाली गर्भवती महिलाएं फैली अव्यवस्थाओं को लेकर इस कदर परेशान हैं कि उन्हें बेड तक लेने के लिए सिफारिश करवानी पड़ती है, जिनके पास कोई सिफारिश नहीं है वे इधर-उधर भटकती रहती हैं। प्रसव के बाद संक्रमण का खतरा
प्रसव के बाद जहां महिला विश्राम करने के बाद घर जा सकती है। वहीं मेडिकल कालेज चंबा में संक्रमण की वजह से बच्चे या मां के बीमार हो जाने का खतरा बढ़ रहा है। हालंाकि अस्पताल का रिकार्ड खंगाला जाए तो हर वर्ष वहां जिला के जगह-जगह से आने वाली महिलाओं की प्रतिशतता में वृद्धि हो रही है। इससे ओपीडी में 40 से 50 प्रतिशत वृद्धि हुई है।
अस्पताल को मेडिकल कालेज का दर्जा तो प्राप्त है, लेकिन महिलाओं को परेशानियों से दो चार होना पड़ रहा है। मेडिकल कालेज में बेड की कमी के कारण दिक्कत हो रही है। कालेज प्रबंधन बेड की कमियों को दूर करने का प्रयास कर रहा है। यह बात बिल्कुल सही है कि बेड की कमी के कारण एक बेड पर दो-दो महिलाओं को भर्ती करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले इसके लिए पूरे प्रयास किए जा रहे है। बेड की कमी को पूरा करने का मामला उच्च अध्किारियों के समक्ष प्रमुख्ता के साथ उठाकर जल्द समस्या का समाधान किया जाएगा।
-देविद्र कुमार, चिकित्सा अधीक्षक मेडिकल कालेज चंबा
