फोरलेन की भेंट चढ़ा मार्ग; कंपनी ने नया रास्ता बनाने का किया था वादा, एक साल बाद भी नहीं बना
कोटला – स्वयम
जिला कांगड़ा के अधीन त्रिलोकपुर में भगवान शिव का प्राकृतिक मंदिर है, जो कि लोगों की आस्था का केंद्र है। सावन माह में हर सोमवार को त्रिलोकपुर के प्राकृतिक शिव मंदिर में भोलेनाथ के दर पर भक्तों का दर्शनों के लिए सैलाब उमड़ता है।
यह मंदिर गुफानुमा है। इस मंदिर के भीतर छत से ऐसी विचित्र जटाएं सी लटकती नजर आती हैं, जिन्हें देखने पर ऐसा प्रतीत होता है मानों छत से सांप लटक रहे हों। शिव प्रतिमा के दोनों ओर पत्थर के स्तंभ खड़े हैं। छत से पानी टपकने के कारण अंदर सीलन का आभास होता है।
गुफा के आकार में बने इस मंदिर में प्रवेश करते ही सिर अपने आप शिव प्रतिमा के समक्ष श्रद्धा से झुक जाता है। मंदिर के बाहर एक छोटा सा नाला बहता है। क्षेत्र में भारी बरसात होने पर इस नाले में भयंकर बाढ़ आती है। नाले में कई विशाल पत्थर की शिलाएं अजीब-अजीब सी आकृतियों जैसी लगती हैं।
पुरातन काल से इन पत्थरों को आकार देकर बनाई गई नंदी की प्रतिमा, हनुमान जी,भैरो बाबा, मां सरस्वती, भगवान शिव, विष्णु लक्ष्मी की प्रतिमाएं हर किसी को अचंभित करती हैं। इस मंदिर को जाने वाला रास्ता फोरलेन निर्माण की भेंट चढ़ गया है तथा अब ऐसे में श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा।
मंदिर के वरिष्ठ पुजारी महंत अविनाश गिरी ने बताया कि फोरलेन निर्माण कार्य के दौरान मंदिर का रास्ता ध्वस्त हो गया था
तथा फोरलेन निर्माण कंपनी ने नया रास्ता बनाने का वादा किया था। अब नए पुल सहित फोरलेन का निर्माण कार्य भी लगभग पूरा हो गया है, लेकिन अभी तक मंदिर के लिए रास्ते का निर्माण कार्य नहीं हुआ है। श्रद्धालु ऊबड़- खाबड़ रास्ते से मंदिर में पहुंच रहे हैं, जो कि लगातार धंस रहा है तथा कभी भी अनहोनी हो सकती है।
उन्होंने प्रशासन से मंदिर के लिए रास्ते का निर्माण शीघ्र करने की मांग की है। उधर, फोरलेन निर्माण कंपनी के अधिकारी राजेश नैयर ने बताया कि फिलहाल रास्ते को लोगों के जाने के अनुरूप समतल कर दिया जाएगा एवं रास्ते का निर्माण कार्य पूरा होने में कुछ समय लगेगा।

