टांडा मेडिकल कालेज में ‘दिल’ के इलाज पर ताला, मरीज बेहाल

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कार्डियोलॉजी विभाग बंद; हृदय रोगी दर-दर भटकने को मजबूर, डाक्टरों की कमी ने रोकी धडक़नें, टांडा में इलाज ठप

काँगड़ा – राजीव जस्वाल

डाक्टर राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा महाविद्यालय टांडा अस्पताल के कार्डियोलॉजी ह्रदय रोग विभाग पर गुरुवार को बंद हो गया और ताला लगा दिया गया, जिसके कारण दूरदराज से आए हृदय रोग से ग्रस्त गंभीर मरीज निराश होकर बिना ओपीडी के ही वापिस लौटने को मजबूर हो गए।

‘दिव्य हिमाचल’ ने दो महीने पूर्व खबर प्रकाशित भी की थी कि टांडा मेडिकल कालेज का कार्डियोलॉजी विभाग बंद हो सकता है, सबका ध्यान इस ओर करने की भरपूर कोशिश की थी, परंतु खबर को हल्के में लेने का नतीजा आज सामने आ गया। टांडा मेडिकल कालेज का कार्डियोलॉजी विभाग गुरुवार को आखिरकार बंद हो गया।

छह जिलों से मरीजों को कार्डियोलॉजी विभाग में कोई भी सीनियर, रेजिडेंस, जूनियर या अन्य कोई डाक्टर ओपीडी के लिए नहीं मिल सका। टीएमसी के कार्डियोलॉजी विभाग में विभागाध्यक्ष एचओडी डा. मुकुल भटनागर ही उपलब्ध हैं, लेकिन उन्हें मजबूरी में इमर्जेंसी में आने वाले सीरियस मरीजों को कैथ लैब में ऑपरेट करना पड़ रहा है।

जाहिर सी बात है कि एक डाक्टर सभी व्यवस्थाएं नहीं संभाल सकता है। इस कारण गुरुवार को कार्डियोलॉजी विभाग को पूर्णतया बंद करना पड़ गया, न कोई ओपीडी और न ही कोई अन्य टेस्ट हो सके। अगर कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष को कोई अचानक कार्य पड़ जाता है या डाक्टर बीमार होते हैं, तो ऐसी स्थिति में प्रदेश के दूसरे बड़े टांडा अस्पताल के पूरे कार्डियोलॉजी विभाग कैथ लैब सहित पूर्णतया लंबे समय के लिए बंद करना पड़ जाएगा।

लेकिन कार्डियोलॉजी विभाग को बंद करने की नौबत इसलिए आई क्योंकि वैसे तो वर्तमान समय में टांडा अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग में विभागाध्यक्ष एचओडी डा. मुकुल भटनागरए, डा. नरेश राणा, डा. अंबुधर, डा. जतिंद्र हैं, लेकिन डाक्टर नरेश राणा बीमार चल रहे हैं। डाक्टर अंबुधर दो महीनों के लिए नीदरलैंड ऑब्जर्वेशन फैलोशिप करने जा चुके हैं और डाक्टर जितेंद्र अभी छुट्टी पर चल रहे हैं । टांडा अस्पताल में छह एसआर डाक्टरों के पद स्वीकृत हैं और वह भी रिक्त चल रहे हैं।

एसआर डाक्टरों की कमी के चलते बढ़ी परेशानी

टीएमसी के कार्डिलॉजी विभाग में एसआर डाक्टरों की कमी के चलते साथ कैथ लैब इको टेस्टों सहित अन्य टेस्टों के लिए भी मरीजों को भारी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। कैथ लैब में पुरानी मशीनरी व स्टाफ की कमी के कारण समस्याओं से मरीजों को जूझना पड़ रहा है।

हालांकि टांडा मेडिकल कालेज के प्रशासन तथा कार्डियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. मुकुल भटनागर ने डीएम के लिए सरकार से स्वीकृति मांगी है। प्रदेश के दूसरे बड़े अस्पताल में हार्ट रोग के रोगियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए टीएमसी में रोगियों के उपचार के लिए 2016 में कैथ लैब की शुरुआत हुई थी तथा यहां अति आधुनिक मशीनों को लगाया गया था।

यहां लगी मशीनें अब लगभग 10 साल पूर्ण कर चुकी हैं और कुछ समय बाद यह भी अपनी समय अवधि पूर्ण कर लेगी। प्रदेश के दूसरे बड़े टांडा अस्पताल में 45 विधानसभाओं के छह जिलों चंबा मंडी, ऊना, हमीरपुर, कुल्लू और 16 लाख से अधिक की आबादी वाले सबसे बड़े जिला कांगड़ा से मरीज उपचार के लिए पहुंचे हैं।

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