जीना सीखो

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हिमखबर – डेस्क

अपने लिए न सही, दूसरों के लिए जीना सीखो।
गम से भरे चेहरों को, ज़रा खिलखिलाना सीखो।

मोहब्बत में तो, हर कोई मुस्कुराता है
दिल टूट जाने पर भी, ज़रा जीना सीखो।

अपनो ने दगा दे दिया तो, क्या हुआ ?
गैरों को अपना बनाकर, गले लगाना सीखो।

मिट्टी हुए जीवन के, संजोये हुए ख्वाब तो, क्या हुआ ?
उस मिट्टी को ही, अपने सीने से लगाकर, अपना बनाना सीखो।

मौलिकता प्रमाण पत्र

मेरे द्वारा भेजी रचना मौलिक तथा स्वयं रचित जो कहीं से भी कॉपी पेस्ट नहीं है।

राजीव डोगरा, (भाषा अध्यापक), गवर्नमेंट हाई स्कूल ठाकुरद्वारा
पता-गांव जनयानकड़, पिन कोड -176038, कांगड़ा हिमाचल प्रदेश
9876777233
rajivdogra1@gmail.com

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