
चौपाल के वन परिक्षेत्र थरोच में भालुओं के आतंक ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। रविवार को एक भालू ने थरोच वन परिक्षेत्र के नेवल वन खंड की खंडयान बीट में गश्त कर रहे दो वन कर्मियों को हमला कर बुरी तरह नोच डाला।
शिमला- जसपाल ठाकुर
वन मंडल चौपाल के वन परिक्षेत्र थरोच में भालुओं के आतंक ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। रविवार को एक भालू ने थरोच वन परिक्षेत्र के नेवल वन खंड की खंडयान बीट में गश्त कर रहे दो वन कर्मियों को हमला कर बुरी तरह नोच डाला। जानकारी के अनुसार खंडयान बीट में चौकीदार के पद पर तैनात यशपाल पुत्र श्रीचंद गांव शावड़ा एवं जगत राम पुत्र झीणूं राम गांव खुडोग जंगल में गश्त कर रहे थे।
इस दौरान एक भालू ने यशपाल पर अचानक हमला कर दिया। यशपाल के दूसरे साथी जगत राम ने अपने साथी को भालू से छुड़ाने की कोशिश की, जिस पर खूंखार भालू ने यशपाल को छोड़ कर जगत राम पर हमला बोल दिया और उसका सिर और मुंह बुरी तरह नोच डाला।
यशपाल ने हमले की सूचना बीट गार्ड कर्म चंद को दी। कर्म चंद ने ग्रामीणों के साथ घटनास्थल पर पहुंच कर लहूलुहान हो चुके एक घायल को रोहड़ू व दूसरे को नेरवा अस्पताल पहुंचाया। खूंखार भालू के हमले में बुरी तरह घायल हो चुके दोनों वन कर्मियों को रोहड़ू और नेरवा अस्पताल में उपचार देने के बाद आइजीएमसी शिमला रेफर कर दिया गया है। घटना की सूचना मिलने पर क्षेत्रीय अराजपत्रित कर्मचारी कल्याण संघ के अध्यक्ष अनिल कुमार ने अस्पताल जाकर घायलों का हालचाल जाना।
थरोच क्षेत्र से लेकर उत्तराखंड की सीमा टेलर व किरण पंचायतों तक इन भालुओं का आतंक व्याप्त है। लोग दिन को भी अपने घरों से बाहर निकलने से घबराने लगे हैं। यही नहीं स्कूल खुल जाने के बाद लोगों को अपने बच्चों को स्कूल भेजने की भी चिंता बढ़ गई है। उल्लेखनीय है कि इससे वन परिक्षेत्र थरोच के तहत शिल्ला क्षेत्र में भालू तीन अलग-अलग हमलों में पांच लोगों को घायल कर अस्पताल पहुंचा चुके हैं।
लोगों ने विभाग से भालू को पकड़ने की मांग उठाई
क्षेत्रीय अराजपत्रित कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अनिल कुमार, उपाध्यक्ष हरीश झगटा, सचिव मनोज कुमार, प्रेस सचिव सुमन शर्मा तथा समस्त सदस्यों ने विभाग से मांग की है कि वनों में दिन-रात ड्यूटी देने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाए जाएं। आदमखोर भालू के आतंक के साए में जी रहे क्षेत्र के लोगों ने वन विभाग से मांग की है कि आदमखोर हो चुके इन भालुओं को पकड़कर किसी सुरक्षित सेंचुरी एरिया में छोड़ा जाए, ताकि लोगों को इनके आतंक से निजात मिल सके।
