गुम्मा नमक मिलने से पशुपालकों के चेहरे खिले पर मूल्य अधिक होने पर रोष

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बिलासपुर, सुभाष

करीब 15 वर्षों की लम्बी ब्रेक के बाद जिला मण्डी की गुम्मा नमक खानों में दोहन होने से अब पुनः पशुपालकों को गुम्मा नमक मिलना शुरू हो गया है। बाजारों में गुम्मा नमक दिखने से जहां पशुपालकों व भेड़पालकों के चेहरे पर झलक रही खुशी को साफ देखा जा सकता है तो वहीं पहले की तुलना में अब इस नमक का 10 गुणा अधिक 50 रु किलो मूल्य हो जाने से किसानों के बीच निराशा का भी माहौल है।

आपको बता दें कि हिमाचल के जिला मण्डी में द्रंग, गुम्मा तथा मैगल नामक स्थानों पर इस चट्टानी नमक के भंडार उपलब्ध हैं जिनका दोहन स्वतंत्रता प्राप्ति से भी पूर्व किया जा रहा है। परन्तु पिछले कई वर्षों से कुछ कानूनी औपचारिकताओं तथा अनाधिकृत तौर पर इस चट्टानी नमक का दोहन होने से इस खनन कार्य को पूर्ण रूप से बन्द कर दिया गया था जिसके फलस्वरूप बाजार में इस चट्टानी नमक की कमी आ गई थी।

इस औषधीय नमक के न मिलने से मजबूरी में पशुपालकों को सिंधु या अन्य सफेद नमक पशुओं को देकर ही काम चलाया जा रहा था। स्वारघाट में बाजार तथा हाइवे किनारे ट्रालियों के माध्यम से बिक रहे इस गुम्मा नमक को स्थानीय किसानों सहित गुजरते पर्यटक भी इस औषधीय नमक को हाथोंहाथ ले रहे हैं।

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