
व्यूरो रिपोर्ट
शिमला के जंगलों में उगने वाला पहाड़ी मशरूम यानी गुच्छी की सब्जी का नाम तो आपने सुना होगा यदि यही सब्जी चंगर क्षेत्र जैसे खुश्क इलाके में उगे तो यह बात सोचने पर जरूर मजबूर कर देगी। जी हां, यह बात सच है। जिला कांगड़ा की खुंडिया तहसील के एक छोटे से गांव में श्रेष्ठा कंवर के घर कुदरती रूप से गुच्छी उगी है।
जब उन्होंने इस सबसे महंगी सब्जी को अपने घर के पास उगा देखा तो उन्होंने इसे सरलता से लेते हुए इसे इग्नोर कर दिया। लेकिन जब उन्होंने अपने घर की नीचे वाले फ्लोर जो उन्होंने किराये पर दे रखी है उसमें कापी बनाने का एक कारखाना लगा है।
उसमें शिमला से काम करने वाली एक युवती को इस के बारे में बताया तो उन्होंने इस खुंभ रूपी चीज को गुच्छी बताया और कहा कि यह तो शिमला के जंगलों में बड़ी दुर्लभ पाई जाती है और इसकी कीमत भी काफी ज्यादा होती है। जिसके बाद श्रेष्ठा कंवर ने इसे तोड़ा ओर इसको थाली में रख कर इसकी फ़ोटो खींच कर अपने रिश्तेदारों भेजी जिसके बाद सभी ने इसे गुच्छी की सब्जी ही बताया।
चंगर क्षेत्र में गुच्छी का उगना हैरान करने वाला
श्रेष्ठा कंवर ने बताया कि यह सब्जी उनके घर के ग्राउंड वाले फ्लोर में घर के लैंटल व बाथरूम के पानी की निकासी की नाली का पानी जहां गिरता है वहां उगी थी। उन्होंने बताया कि यह उन्होंने पिछले साल भी देखी थी लेकिन उन्होंने इसकी परवाह नहीं की।
लेकिन इस साल भी वही चीज जब उगी तो उन्होंने उसे उखाड़ा तो उन्होंने उसे शिमला निवासी महिला को बताया तो पता चला कि यह गुच्छी की सब्जी है। उन्होंने बताया कि इस सब्जी के पंद्रह पीस उन्होंने वहां से उखाड़े। उन्होंने बताया कि यह सब्जी जहां उगी थी वहां न तो कभी धूप आती है ओर लगातार पानी गिरने से यह जगह हमेशा ठंडी रहती है।
दरअसल, पानी की कमी, ओर भीषण गर्मी वाले इलाके को चंगर कहा जाता है, ऐसे में इस तरह की सब्जी का इस क्षेत्र में उगना आस पास में चर्चा का विषय बना हुआ है।
क्या है गुच्छी और क्या है इसकी कीमत व गुण
भारत की सबसे महंगी बिकने वाले सब्जी का नाम है गुच्छी, जिसकी कीमत तीस से पैंतीस हजार रुपये प्रतिकिलो है। यह आमतौर पर ठंडे इलाकों जैसे किन्नौर, कुल्लू, आनी, शिमला के जंगलों ने पाई जाती है जहां पूरा साल ठंड होती हो। इसके लिए तापमान 14 से 17 डिग्री चाहिए होता है।
औषधीय गुणों से भरपूर इस गुच्छी की विदेशों में भी इस काफी डिमांड है। इसका विदेशी नाम मोर्चेला है। यह अक्सर फरवरी से मार्च महीने के अंत तक पाई जाती है। अधिकतर इसे सूखा कर इसका व्यापार किया जाता है। गुच्छी पर सोलन के चम्पाघाट में रिसर्च व अनुसंधान केंद्र में इस पर शोध भी किया जा रहा है।
उपनिदेशक बागवानी, कमलसिंह नेगी के बोल
गुच्छी फरवरी-मार्च के अंत से अप्रैल तक ठंडे, नम मौसम में पाई जाती है, यह प्राकृतिक रूप से उगने वाली सब्जी है, लेकिन आजकल के मौसम में गुच्छी का उगना खुद में ही अचंभा है। मौसम में आ रहे बदलाव को भी इसका एक कारण मान सकते हैं।
