कोटला के सोनू अपनी प्रतिभा से पारम्परिक तरीके से औजार बनाने का कर रहे काम, बोले, कई पीढ़ियों से औजार बनाने व मुरम्मत करने का किया जा रहा है कार्य
हिमखबर – डेस्क
आज के आधुनिक समय मे जहां पारम्परिक कलाएं एवं संस्कृति धीरे धीरे बिलुप्त होती जा रही है। वहीं काँगड़ा के कई स्थानों मे प्राचीन पद्धति से औज़ार बनाने की कला आज भी जीवित है।
जिला काँगड़ा के ज्वाली उपमण्डल के कोटला निबासी सोनू सिंह जो पिछले कई बर्षो से पारम्परिक तरीके से औज़ार बनाने का काम कर रहे है।
उन्होंने बताया कि वह पीढ़ी दर पीढ़ी यह काम कर रहे हैं। उनके दादा परदादा यही काम करते थे। और अभी भगवान विश्वकर्मा की कृपा से वह इस काम को कर रहे हैं। परन्तु आज के समय में यह कलाएं धीरे धीरे विलुप्त होती जा रही हैं।
उन्होंने बताया की पारम्परिक तरीके से औजार बनाने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है। पारम्परिक तरीके से बने हुए औजार आधुनिक तरीके से बने हुए हजारों से काफी मजबूत होते हैं।
आधुनिक औजार नरम लोहे के होते हैं इसलिए जल्द ही खराब हो जाते है। उन्होंने बताया कि वह यहाँ के स्थानीय लोगों के लिए औजार बनाते हैं व पुराने औजारों की मुरम्मत भी करते है।
उन्होंने बताया कि आजकल की युवा पीढ़ी नॉकरी की तलाश में दर दर के धक्के खा रहे है परन्तु अपने पुश्तैनी कार्य को भुला कर कम्पनियों में साहुकारों की गुलामी करने को मजबूर है।
उन्होंने बताया कि जहां तक उन्हें मालूम है शिक्षा के सही मायने है जो आपको बंधनो से मुक्त कर दे वही शिक्षा है और मैं इस कार्य को अपनी मर्जी और खुशी के साथ करता हूँ किसी का मेरे ऊपर कोई दबाव नहीं।
उन्होंने बताया कि कोटला क्षेत्र ही नहीं बल्कि कोटला के साथ लगते जिला चंम्बा के कुछ क्षेत्रों के जमीदार लोग भी उनके यहां अपने औजारों की मुरम्मत के लिए अक्सर मेरे पास ही आते है तथा मुझे ये कार्य करने में आनंद आता है।

