कांगड़ा के बूसल गांव के युवक की मेलशिया में बीमारी के कारण हुई थी मौत
व्यूरो रिपोर्ट
कबूतर बाजी की बलि चढ़े प्रवीण कुमार का मंगलवार को उनके पैतृक गांव बूसल में डेढ़ महीने बाद अंतिम संस्कार किया गया। गौरतलब है कि कांगड़ा जिला के बड़ोह के बूसल गांव के 45 वर्षीय प्रवीण कुमार और उसके नौ अन्य साथियों को थाईलैंड में नौकरी देने का प्रलोभन दिया गया था।
प्रवीण कुमार ने गरीबी के कारण पैसा न होने के कारण रिश्तेदारों से पैसा पकडक़र किसी तरह विदेश जाने का जुगाड़ कर लिया था । सपना यही था कि विदेश जाकर खूब पैसा कमाऊंगा तथा गरीबी दूर करूंगा , लेकिन उसे क्या पता था कि उसे विदेश के नाम पर ठगा जा रहा है।
दिसंबर 2022 को उन्हें थाईलैंड के लिए जहाज में बैठा दिया गया और कहा कि हवाई अड्डे पर उन्हें कंपनी के लोग मिल जाएंगे । हवाई अड्डे पर उन्हें पता चला कि वह जिस जहाज पर उन्हें बिठाया गया था, वह थाईलैंड नहीं बल्कि मलेशिया आया है।
मलेशिया पहुंचने पर उन्हें अवैध वीजा होने के कारण गिरफ्तार कर लिया गया। कुछ दिन बाद जेल में ही प्रवीण कुमार की तबीयत खराब हो गई तथा 13 जून, 2023 को उनकी मृत्यु हो गई।
जैसे ही प्रवीण की मौत का समाचार पत्नी मंजू बाला को मिला तो वे बेसुध हो गई। बच्चों के साथ-साथ चिंता सता रही थी कि पति की पार्थिव देह को कैसे लाया जाए। सब जगह से हताशा मिलने के बाद उसने उम्मीद ही छोड़ दी थी कि वह अपने पति के कभी अंतिम दर्शन कर पाएगी, लेकिन उसके लिए सहारा बनकर आए भाजपा के संगठन मंत्री पवन राणा।
पवन राणा ने प्रयासों से प्रवीण कुमार को अपने गांव की मिट्टी नसीब हो सकी। पवन राणा ने नई दिल्ली स्थित मलेशिया दूतावास तथा मलेशिया में भारतीय दूतावास से संपर्क साध कर प्रवीण की पार्थिव देह को भारत लाने का बंदोबस्त करवाया।
मंगलवार को प्रवीण की पार्थिव देह दिल्ली पहुंची, जिसे एंबुलेंस के माध्यम से बुधवार को उनके पैतृक गांव बूसल लाया गया, जहां हिंदू रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया गया। प्रवीण कुमार अपने पीछे पत्नी व दो बेटो को अकेला छोड़ गया।

