शिमला – नितिश पठानियां
शिमला के संजौली के बाद अब कसुम्पटी में भी मस्जिद गिराने की मांग पर लोग अड़ गए हैं। इसको लेकर कसुम्पटी वासियों का एक प्रतिनिधिमंडल नगर निगम आयुक्त भूपेंद्र अत्री से मिलने पहुंचा। मगर नगर निगम आयुक्त किसी काम की वजह से दफ्तर में नहीं मिले।
लिहाजा कसुम्पटी वासियों ने यह ज्ञापन डीसी शिमला अनुपम कश्यप को सौंपा और मस्जिद के अवैध निर्माण को गिराने की मांग की। नगर निगम आयुक्त कोर्ट एक साल पहले ही कसुम्पटी मस्जिद के अवैध हिस्से को तोड़ने के आदेश सुना चुका है। मगर वक्फ बोर्ड ने नगर निगम आयुक्त के फैसले को सैशन कोर्ट में चुनौती दे रखी है। अभी तक यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है।

कसुम्पटी वार्ड की पार्षद रचना शर्मा ने कहा कि हर शुक्रवार को मस्जिद के छोटे से ढांचे में 100 से ज्यादा लोग नमाज पढ़ने आते हैं, तब यहां चलना-फिरना तक मुश्किल हो जाता है। इसलिए मस्जिद को गिराने की नगर निगम आयुक्त से मांग की गई।
वहीं शिमला के पूर्व डिप्टी मेयर राकेश शर्मा ने कहा कि कसुम्पटी से एक किलोमीटर आगे दूसरी मस्जिद है, ऐसे में कसुम्पटी में मस्जिद की क्या जरूरत है। उन्होंने कहा कि इससे बाजार का माहौल बिगड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह जमीन वक्फ बोर्ड ने सदीक मोहम्मद की घरवाली मुमताज बेगम के नाम पर लीज पर दी थी लेकिन उनके बच्चों ने इसे बाहर से आने वाले लोगों को दे दिया।
गौर रहे कि संजौली अवैध मस्जिद मामले के बाद अब कसुम्पटी में भी अवैध मस्जिद को तोड़ने की मांग को लेकर स्थानीय लोगों द्वारा कई बार धरना-प्रदर्शन कर दिया गया है, मगर इस धरना-प्रदर्शन को अभी तक एमसी प्रशासन व जिला प्रशासन की ओर से गौर नहीं किया जा रहा था। इसी को देखते हुए स्थानीय लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल एमसी प्रशासन व जिला प्रशासन के मिलने के लिए उनके कार्यालय पहुंचा व अपनी मांगों को लेकर एक ज्ञापन सौंपा।

