हिमखबर डेस्क
सेना प्रशिक्षण कमान (आरट्रैक) की विदुर वक्ता पहल भारतीय सेना की रणनीतिक क्षमता को नई मजबूती देगी। मंगलवार को आरट्रैक शिमला में अलंकरण समारोह में जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा ने कहा कि यह एक अत्याधुनिक रेड टीमिंग अवधारणा है, जिसका उद्देश्य युद्ध या सैन्य ऑपरेशन की योजना बनाते समय दुश्मन की सोच और रणनीति को समझकर अपनी तैयारियों को अभेद्य बनाना है।
महाभारत के विदुर से प्रेरित यह पहल भारतीय योजनाओं की खामियों को उजागर कर उन्हें और मजबूत बनाने का काम करती है। इसका सफल परीक्षण ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि विदुर वक्ता को 2027 तक पूरे सेना स्तर पर लागू करने का लक्ष्य है। इसके साथ ही 2,030 तक 33 विशिष्ट तकनीकों को आत्मसात करने के लिए 15 संस्थानों को सेंटर ऑफ एक्सपर्टीज के रूप में विकसित किया जा रहा है।
सीओएएस क्वाड्रेनियल ट्रेनिंग डायरेक्टिव 2025-2029 के तहत प्रशिक्षण ढांचे को आधुनिक बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पदोन्नति और प्रतियोगी परीक्षाओं को ऑनलाइन मोड में परिवर्तित किया जा रहा है।
उन्होंने जेंडर न्यूट्रैलिटी और सैन्य कूटनीति के क्षेत्र में भी आरट्रैक शिमला की प्रतिबद्धता दोहराई।
आधुनिक युद्ध में ड्रोन सेना के लिए ईगल ऑन द सोल्जर
समारोह में प्रशिक्षण वर्ष 2025-26 के उत्कृष्ट संस्थानों और कर्मियों को सम्मानित किया गया। सेना कमांडर ने डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन के तहत चल रही 57 पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि आरट्रैक भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप भारतीय सेना को और सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्यरत है।
लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा ने आधुनिक युद्ध में ड्रोन की बढ़ती भूमिका पर बल देते हुए कहा कि हर सैनिक को ड्रोन संचालन में प्रशिक्षित किया जाएगा। ड्रोन सेना के लिए ईगल ऑन द सोल्जर है।
ड्रोन सैनिकों को दूरस्थ क्षेत्रों तक निगरानी और कार्रवाई में सक्षम बनाते हैं। अब तक 50,000 से अधिक सैन्य कर्मियों को ड्रोन प्रशिक्षण दिया जा चुका है। सेना के हर जवान को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

