हिमखबर डेस्क
अमरीका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग के 25वें दिन बड़ी खबर आई है। रिपोट्र्स के अनुसार ईरानी सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई अमरीका के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं।
खामेनेई ने युद्ध को ईरान की शर्तों के अनुसार जल्द खत्म करने पर सहमति जताई है। अल अरबिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमरीकी दूत स्टीव विटकॉफ को गुप्त रूप से बताया कि सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने वार्ता के लिए अनुमति दी है।
अमरीका ने बातचीत के लिए ईरान को मध्यस्थ देशों के जरिए प्रस्ताव भेजा था। सीबीएस न्यूज से बातचीत में ईरान के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अमरीका ने मध्यस्थ देशों के जरिए बातचीत का संदेश भेजा है।
अधिकारी के मुताबिक अमरीका की ओर से कुछ प्वाइंट्स भेजे गए हैं, जिनकी फिलहाल समीक्षा की जा रही है। खबर यह भी है कि पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये के साथ मिलकर ईरान और अमरीका के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है।
उधर, ईरान ने मंगलवार तडक़े तेल अवीव सहित मध्य इजरायल पर मिसाइलों की कई लहरें दागीं, जिससे व्यापक नुकसान हुआ। इजरायली अधिकारियों के अनुसार, आधी रात के बाद 10 घंटे से भी कम समय में ईरान ने सात चरणों में मिसाइल हमले किए।
तेल अवीव सहित कई स्थानों पर हमलों के प्रभाव देखे गए, जहां इमारतों को नुकसान, जलते वाहन और घना धुआं देखा गया।
डिमोना क्षेत्र में भी एयर रेड सायरन बजाए गए, जो नेगेव परमाणु अनुसंधान केंद्र के निकट स्थित है, जिससे हमलों के दायरे के विस्तार का संकेत मिला है।
इजरायली रक्षा बल (आईडीएफ) ने बताया कि कई स्थानों पर खोज एवं बचाव अभियान चलाया गया और रातभर मिसाइल हमले जारी रहे। इसी बीच, मिसाइल हमलों के चलते इजरायल की संसद (नेस्सट) की कार्यवाही भी कुछ समय के लिए रोकनी पड़ी, जिसे बाद में फिर शुरू किया गया।
इसके साथ ही इजरायल ने भी जवाबी कार्रवाई तेज करते हुए ईरान में 50 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया, जिनमें मिसाइल लांच साइट और सैन्य अवसंरचना शामिल हैं।
अधिकारियों के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक ईरान में 3,000 से अधिक ठिकानों पर हमले किए जा चुके हैं। मौजूदा घटनाक्रम को संघर्ष के सबसे तीव्र चरणों में से एक माना जा रहा है, जहां एक ओर सैन्य कार्रवाई जारी है, वहीं कूटनीतिक संकेत अब भी अस्पष्ट बने हुए हैं।
पीएम मोदी बोले; जंग जारी रही, तो गंभीर दुष्परिणाम होंगे
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर राज्यसभा में वक्तव्य देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि इस संकट ने पूरी दुनिया में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है।
प्रधानमंमत्री ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में ईरान द्वारा जहाजों का रास्ता रोकना अस्वीकार्य है। इस संकट की घड़ी में भारत ने संवाद का रास्ता अपनाया है और इसी के जरिए भारत ने अपने जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से बाहर निकालने में सफलता पाई है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने पश्चिम एशिया में सभी पक्षों से बातचीत की है। पीएम ने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद पश्चिम एशिया के करीब सभी देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो बार बातचीत कर चुके हैं। खाड़ी के देशों में बसे भारतीयों की सुरक्षा और आजीविका सरकार के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है।
भारत विवाद के शांतिपूर्ण समाधान के पक्ष में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि पश्चिम एशिया का संकट भारत के लिए चिंता का कारण है। अगर यह जंग जारी रही, तो इसके गंभीर दुष्परिणाम होंगे।
भारत यह प्रयास कर रहा है कि किसी भी सेक्टर में दूसरे देशों पर बहुत अधिक निर्भरता न हो। पीएम ने शिप बिल्डिंग से लेकर रेयर अर्थ मिनरल्स तक, आत्मनिर्भरता के प्रयास गिनाए और कहा कि इस संकट ने दुनिया को हिला दिया है।
इससे रिकवर करने में भी दुनिया को काफी समय लगेगा। पीएम ने कहा कि भारत सरकार पल-पल बदलते हालात पर नजर रखे हुई है।

