अपने परिवार में अंधेरा लेक़िन एक और परिवार को रोशनी दे गए दिवंगत विक्कू

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हिमखबर डेस्क

हमीरपुर व मंडी की सीमा के साथ सटे डरवाड़ गांव का विक्कू अब उसकी आंखों से किसी और की आंखे इस दुनिया को देख रहा है। बेशक अब विक्कू इस दुनिया में नही है, लेकिन उसकी आंखें किसी और की ज़िन्दगी में रोशनी कर गई है।

गौरतलब है कि 3 जून को 38 वर्षीय विकास उर्फ़ विक्कू अपने घर के नज़दीक निजी कार में दुर्घटना में गम्भीर रूप से घायल हो गया था। दो दिन पहले यानि 15 जून को पीजीआई चंडीगढ़ में जिंदगी की जंग हार गया। जिससे उनके परिवार में तो सदा के लिए अंधेरा छा गया।

लेक़िन परिजनों विशेषतौर पर बड़े भाई केहर और उनके जीजा रवि कुमार द्वारा उनकी आंखें दान करने के फ़ैसले से की क्षेत्र के सभी लोग सराहना कर रहे हैं और इसे अनुकरणीय फैसला बता रहे हैं। मृतक विकास के इकलौते बेटे नोनू-ऋतुल ने 7 वर्ष की उम्र में ही पिता को खो दिया। वहीं बड़ी बहन बबली बड़े भाई केहर ने अपना छोटा भाई तो मां शिवी ने बेटा व पत्नी इंदु ने पति खो दिया।

विक्कू की मौत से पूरा गांव शोक में डूबा हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार दुर्घटना के दिन मृतक विक्कू साथ वाले गांव घरवासड़ा में गाड़ी लेकर गया था और वापसी में अपने ही गांव में दौन्न मोड़ पर गाड़ी का अचानक नियंत्रण खो दिया।

नेत्रदान पर पंक्तियां

स्थानीय लोगो और परिजनों ने तुरंत उसे हमीरपुर अस्पताल ले गए जहां पर प्राथमिक उपचार के बाद उसे पीजीआई चंडीगढ़ रैफर किया गया। सात वर्षीय बेटे द्वारा जब पिता के अंतिम संस्कार की रस्में अदा की गई तो हर किसी की आंखे नम थी। लेकिन मौत के बाद भी विक्कू किसी और कि नज़रों से इस दुनिया को देखता रहेगा।

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