चम्बा- भूषण गुरुंग
शालिनी शर्मा “Trinity @ Bakloh” की लेखिका, हिमाचल प्रदेश के बकलोह स्थित 2/4 बाज़ार की निवासी हैं तथा उनका जन्म 27 जुलाई 1970 को हुआ।
सैन्य परिवेश में पली-बढ़ीं शालिनी शर्मा को भारत के विभिन्न भागों की यात्रा करने का अवसर मिला, जिसने उनके अनुभवों, दृष्टिकोण और संवेदनशीलता को समृद्ध किया।
अपने पिता कर्नल धन राज (सेवानिवृत्त) से प्रेरणा तथा भारतीय नौसेना के कैप्टन (आई.एन.) अनिल कुमार शर्मा (सेवानिवृत्त) , Husband, के निरंतर सहयोग से प्रेरित होकर उन्होंने “Trinity @ Bakloh” की रचना की।
यह पुस्तक अपने पाठकों को तीन प्रमुख पात्रों (ट्रिनिटी) तथा उनके परिवारों के जीवन के माध्यम से सुख-दुःख, संघर्ष, प्रेम, त्याग और मानवीय संवेदनाओं की रोमांचक यात्रा पर ले जाती है।
हिमाचल प्रदेश की मनोहारी पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य बसे बकलोह के उदय, वहाँ के लोगों की जीवटता और उनकी सांस्कृतिक विरासत को यह पुस्तक अत्यंत जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है।
अंतिम पृष्ठ पढ़ने के बाद भी इसकी स्मृतियाँ पाठकों के मन में लंबे समय तक बनी रहती हैं।
इसकी कथा एक चलचित्र की भाँति पाठकों को भारत विभाजन से पूर्व, विभाजन के दौरान तथा उसके पश्चात के उथल-पुथल भरे कालखंडों की यात्रा कराती है।
पात्रों के संघर्ष, सफलताओं और असफलताओं के माध्यम से यह पुस्तक मानवीय आत्मबल, साहस और संवेदनशीलता के वास्तविक स्वरूप को उजागर करती है।
मुख्य पात्रों की कहानी अन्य प्रभावशाली व्यक्तित्वों के जीवन से इस प्रकार जुड़ती है कि पाठकों की जिज्ञासा प्रत्येक अध्याय के साथ बढ़ती जाती है और वे आगे क्या होगा, यह जानने के लिए उत्सुक बने रहते हैं।
यह पुस्तक न केवल बकलोह, उसके लोगों तथा गोरखा समुदाय की गौरवशाली विरासत के प्रति पाठकों की रुचि बढ़ाएगी, बल्कि इस ऐतिहासिक स्थान के प्रति व्यापक जागरूकता उत्पन्न करेगी तथा नई पीढ़ी को बकलोह की यात्रा करने और उसके पूर्व गौरव को पुनर्स्थापित करने की प्रेरणा भी देगी।
इस पुस्तक से हर वर्ग का पाठक सहज रूप से जुड़ाव महसूस करेगा—चाहे वह उत्तर-पूर्व एवं पश्चिम भारत के समुदायों से हो, सशस्त्र सेनाओं या गोरखा समुदाय से संबंधित हो, बकलोह एवं हिमाचल प्रदेश का निवासी हो अथवा भारत के किसी भी भाग से। इस पुस्तक के पृष्ठों में अनेक पाठकों को अपने ही परिवार और समाज की झलक दिखाई देगी।
यद्यपि भारत विभाजन और युद्धों जैसे प्रमुख ऐतिहासिक विषयों पर व्यापक अध्ययन और शोध उपलब्ध हैं, फिर भी यह पुस्तक उस दौर को प्रत्यक्ष रूप से जीने वाले सामान्य लोगों के अनुभवों को बिना किसी आडंबर के प्रस्तुत करती है।
यह दर्शाती है कि ऐसे ऐतिहासिक घटनाक्रमों ने आम जनजीवन को शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक स्तर पर किस प्रकार गहराई से प्रभावित किया—ऐसे पहलुओं को, जिन्हें इतिहास की पुस्तकों में प्रायः पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाता।
इस प्रकार यह कृति इतिहास की मानवीय कीमत को समझने की एक नई दृष्टि प्रदान करती है। वास्तविक जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए शालिनी शर्मा ने ऐतिहासिक तथ्यों और मानवीय वास्तविकताओं के बीच की दूरी को पाटने का सार्थक प्रयास किया है।
तीनों मुख्य पात्रों के परस्पर जुड़े जीवन के माध्यम से लेखिका उस युग के समाज की सहजता, सादगी, विनम्रता और मानवीय मूल्यों की एक सजीव झलक प्रस्तुत करती हैं।
हमें विश्वास है कि “Trinity @ Bakloh” अपने पाठकों के ज्ञान, संवेदनशीलता और दृष्टिकोण को समृद्ध करने के साथ-साथ मानवता के लिए प्रेरणा, विवेक और प्रज्ञा का एक प्रकाशस्तंभ सिद्ध होगी। इसके पात्रों का अदम्य साहस, धैर्य और संघर्षशीलता हमें आशा, विश्वास और सकारात्मक भविष्य की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा प्रदान करेगी।
इस पुस्तक का लोकार्पण दिल्ली स्थित प्रकाशन संस्थान Sabre & Quill द्वारा 25 जुलाई 2026 को किया जाएगा। चम्बा से भूषण गुरुंग की रिपोर्ट

