हिमाचल प्रदेश के पालमपुर से जुड़े डॉ. विकास राणा का यंग साइंटिस्ट अवार्ड के लिए चयन हुआ है, उनके शोध को लेकर यह उपलब्धि क्षेत्र और प्रदेश के लिए गौरव का विषय है।
पालमपुर – बर्फू
हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा के लिए यह एक गौरव का क्षण है। पालमपुर उपमंडल के तहत आने वाले मलाहू गांव के होनहार शोधकर्ता डॉ. विकास राणा को प्रतिष्ठित यंग साइंटिस्ट अवार्ड-2026 के लिए चुना गया है।
यह अंतर्राष्ट्रीय स्तर का सम्मान उन्हें कृषि एवं पर्यावरण तकनीकी विकास संस्था (सोसाइटी) की ओर से प्राचीन भारतीय इतिहास, पुरातत्व और पर्यावरण के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट अकादमिक योगदान के लिए दिया जा रहा है।
डॉ. विकास राणा को यह पुरस्कार राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर में 24 से 26 अक्तूबर तक आयोजित होने वाले 8वें विश्व सम्मेलन के दौरान प्रदान किया जाएगा। इस सम्मेलन का मुख्य विषय लाइफ साइंसेज, एग्रीकल्चर, एनवायरनमैंट एंड क्लाइमेट सॉल्यूशंस है। इसमें जीव विज्ञान, कृषि, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोधकर्ता, शिक्षाविद् और विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे।
डॉ. राणा वर्तमान में प्रतिष्ठित पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग में कार्यरत हैं। वे यहां भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के पोस्ट-डॉक्टोरल फेलो के रूप में अपने उन्नत शोध कार्यों को आगे बढ़ा रहे हैं। डॉ. राणा को यह पुरस्कार मुख्य रूप से उनके पीएचडी शोध-प्रबंध (थीसिस) के लिए दिया जा रहा है।
उनके शोध का विषय सतलुज-यमुना विभाजक क्षेत्र में जीविकोपार्जन के प्रतिरूप (3200-1200 ईसा पूर्व): निरंतरताएं और परिवर्तन रहा है। इस शोध में उन्होंने सतलुज और यमुना नदियों के बीच के क्षेत्र में प्राचीन मानव बस्तियों, उनके जीवन यापन के तरीकों और पर्यावरण के साथ उनके अनुकूलन का गहराई से अध्ययन किया है।
उनका यह शोध इस मायने में बेहद खास है कि यह इतिहास और विज्ञान को जोड़ता है। यह अध्ययन स्पष्ट करता है कि प्राचीन समाजों ने प्राकृतिक संसाधनों का कैसे उपयोग किया और बदलते पर्यावरण के साथ खुद को कैसे ढाला।
वर्तमान में जब दुनिया जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौती का सामना कर रही है, तब पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर किया गया यह पर्यावरणीय अध्ययन आधुनिक समाज के लिए भी महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रदान करता है।
अपनी इस शानदार सफलता पर डॉ. विकास राणा ने अपनी शोध-निर्देशिका प्रो. पारु बल सिद्धू के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि प्रोफेसर सिद्धू के निरंतर मार्गदर्शन और प्रोत्साहन ने उन्हें इस शोध यात्रा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
डॉ. राणा के अनुसार यह सम्मान केवल मेरी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह मुझे पुरातात्विक साक्ष्यों को पर्यावरण, सतत विकास और मानव अनुकूलन जैसे व्यापक और सामयिक विषयों से जोड़कर अपने शोध को और आगे ले जाने की प्रेरणा देता है।

