हिमाचल के पारंपरिक जायकेदार पकवान ने जापान तक अपनी पहचान बना ली है। विदेशी मेहमान भी इसके स्वाद के कायल हो गए और जमकर तारीफ की।
शाहपुर – नितिश पठानियां
हिमाचल के व्यंजनों का देश ही नहीं, विदेशों तक बोलबाला है। स्वाद में बेमिसाल और हैल्थ के लिए लाभदायक हिमाचली व्यंजनों को लोग बड़े ही चाव से खाते हैं। यही वजह है कि हिमाचल की समृद्ध पारंपरिक कला, संस्कृति और खानपान समुंद्र पार भी खुशबू बिखेर रही है।
इसी कड़ी में हिमाचली व्यंजनों को जापान तक पहुंचाने की दिशा में एक सफल हिमाचली धाम और पारंपरिक सिड्डू कार्यशाला का आयोजन कुल्लू के नग्गर में हुआ। यह आयोजन भोजन के माध्यम से दो अलग-अलग संस्कृतियों को जोडऩे वाला एक खूबसूरत अनुभव रहा।
इस कार्यशाला का नेतृत्व धरोहर गांव नग्गर की निवासी एवं शेफ आकांक्षा ठाकुर ने किया। अकांक्षा हिमालय ब्रदर होम स्टे संचालित करती हैं। यह उनका पहला अंतरराष्ट्रीय फूड वर्कशाप था। जिसमें उन्होंने जापानी प्रतिभागियों को हिमाचल प्रदेश के पारंपरिक भोजन, स्थानीय सामग्री, खाना बनाने की विधियों और उनसे जुड़ी सांस्कृतिक परंपराओं से परिचित कराया।
इस आयोजन में लगभग 35 प्रतिभागियों ने दोपहर और रात के भोजन में भाग लिया। उन्हें पारंपरिक हिमाचली धाम से प्रेरित कई स्थानीय व्यंजन परोसे गए, जिनमें हिमाचली लाल चावल, जस्तू चावल, कद्दू का खट्टा, सिड्डू, स्थानीय राजमा और मीठे चावल शामिल थे। कार्यशाला में प्रतिभागियों को सिड्डू के बारे में भी बताया गया और इसकी पारंपरिक तैयारी तथा हिमाचली संस्कृति में इसके महत्व से परिचित कराया गया।
जापानी प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया बेहद उत्साहजनक रही। उन्होंने हिमाचली भोजन के अनोखे स्वाद और पारंपरिक तरीकों को खूब पसंद किया और हिमाचल की खाद्य संस्कृति के बारे में जानने में गहरी रुचि दिखाई। उनका प्यार, उत्साह और जिज्ञासा इस पूरे अनुभव को और भी खास बना गई।
यह कार्यशाला शेफ आकांक्षा ठाकुर और जिला कुल्लू के लिए विशेष रूप से गर्व का विषय रहा। पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने राज्य के पारंपरिक भोजन को प्रस्तुत करना और जापान के लोगों के साथ हिमाचल की संस्कृति और स्वाद साझा करना उनके लिए एक यादगार अनुभव रहा। इस सफल आयोजन के बाद प्रतिभागियों ने भविष्य में भी ऐसे और कार्यक्रम आयोजित करने की इच्छा जताई और शेफ आकांक्षा एवं उनकी टीम को दोबारा जापान आने के लिए आमंत्रित किया।

