
धर्मशाला – राजीव जस्वाल
श्री इंद्रु नाग देवता ने गूर के माध्यम से अपना संदेश दिया है कि खनियारा में बादल नहीं फटा है, यहां गंगा की जलधारा फूटी है। जिसने मंदिर के आसपास के क्षेत्र की गंदगी को बहाया है। गूर ने संदेश दिया है कि मंदिर के आसपास की जगह को स्वच्छ रखे और अतिक्रमण न होने दें। जितना क्षेत्र मंदिर का है, वह उन्होंने ले लिया है। किसी को जानी नुकसान नहीं होने दिया है। आगे भी किसी को भी 18 टीकों में नुकसान नहीं होने देंगे। इससे पहले खेलपात्र में यह संकेत दे दिया था।
इंद्रू नाग देवता ने सुख शांति व समृद्धि का आशीर्वाद दिया है। साथ ही अन्य जरूरी पूजा अर्चनाएं बताई हैं और हिदायत दी है कि मंदिर के आस पास के स्थल पर गंदगी न डालें। यह सिर्फ छोटी सी घटना आंखे खोलने के लिए थी। अब भी समय है सुधरने का।
श्री इंद्रु नाग देवता राधा अष्टमी को मणिमहेश न्हौण से वापस अपने मुख्य मंदिर खनियारा लौट आए हैं। तीन खेलपात्र आयोजित हुए, जिसमें मुख्य मंदिर पहुंचने पर देवता के गूर भानी राम व सुरेश कुमार ने देववाणी को सुनाया। सैकड़ों लोग इस मौके पर नाग देवता की वाणी को सुनने के लिए पहुंचे। दोपहर से लेकर देर शाम तक गुर खेल चला।
पहले इंद्रु नाग देवता के मुख्य मंदिर में खेलपात्र हुआ नाग देवता को लेने के लिए ख्वाड़ा नाग गए। ख्वाड़ा नाग मंदिर में खेलपात्र हुआ। फिर वहां से इंद्रु नाग देवता को ढोल नगाड़ों के साथ पालकी में लेकर मुख्य मंदिर पहुंचे।
मुख्य मंदिर में फिर से खेलपात्र हुआ। जिसमें इंद्रु नाग देवता ने खुशी जताई कि आज 18 टीकों की जनता यहां पहुंची है। उन्होंने चेहरे देख लिए खुश हैं। उन्होंने अपनी जगह ले ली है और बादल नहीं फटा था। यह गंगा की पवित्र धारा थी, जिसने गंदगी को साफ किया है अब गंदगी को न होने दें।
लंबे समय के बाद खेलपात्र में पहुंचे इतने लोग
खेलपात्र में सैकड़ों लोग पहुंचे। काफी लंबे समय के बाद ऐसा हो पाया है कि इतनी अधिक संख्या में लोग नाग देवता के खेलपात्र में पहुंचे हैं। अब अगला खेलपात्र भेड़े के मेले को सायर संक्रांति को पटोला में होगा, जहां पर फसलों को लेकर गूर नाग का आदेश सुनाएंगे।
