मेरे महाकाल

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हिमखबर – डेस्क

मैं न जानू काल को, मैं जानू बस महाकाल को।

रिद्धि सिद्धि मुझे न भाए, प्रेम,स्नेह और भक्ति
मुझ में वो सदा जगाये।

हंसते खेलते, मुझे अपने गले लगाएं।
जान शिशु अपना, मुझे रिझाए।

अलख निरंजन बन, मुझे नाद सुनाएं।
चार वेदों का भी, मुझे ज्ञान करवाएं।

योग विद्या मुझे सिखाएं, महाविद्याओं का भी अभ्यास करवाएं।

पूर्ण परब्रह्म मुझको ज्ञान करावे,
तभी जग में महाकाल, जगतगुरु कहलवाये।

मौलिकता प्रमाण पत्र

मेरे द्वारा भेजी रचना मौलिक तथा स्वयं रचित जो कहीं से भी कॉपी पेस्ट नहीं है।

राजीव डोगरा, (भाषा अध्यापक), गवर्नमेंट हाई स्कूल ठाकुरद्वारा
पता-गांव जनयानकड़, पिन कोड -176038, कांगड़ा हिमाचल प्रदेश
9876777233 , rajivdogra1@gmail.com

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