
पिता का हौंसला तो मां की सहमति…किसी का जीवन करेंगी रोशन “क्यूट देवांश” की आंखें
सिरमौर- नरेश कुमार राधे
घर के लाडले देवांश राणा की उम्र महज 3 साल की थी। अचानक ही शरीर के कुछ हिस्सों में सूजन आई। ददाहू के एक आयुर्वेदिक चिकित्सक ने शंका जाहिर की कि क्यूट देवांश को किडनी की समस्या हो सकती है।
माता-पिता ने एक पल भी नहीं गंवाया, उसे लेकर सीधे पीजीआई चंडीगढ़ पहुंच गए। किडनी के इंफेक्शन से देवांश को पीड़ित पाया गया। खैर, दवाएं शुरू हो गई। नन्हीं सी जान को दवाओं का लंबा चार्ट मिल गया। मौजूदा में पंप ऑपरेटर के पद पर हरिपुरधार में तैनात दिवंगत देवांश के पिता संजीव राणा व माता मनीषा राणा ने लाडले के उपचार में कोई कमी भी नहीं रखी।
चंद रोज पहले देवांश ने पीजीआई चंडीगढ़ में अंतिम सांस ली। कोविड के दौरान देवांश का चैकअप रूटीन में तो नहीं हो पाया, लेकिन माता-पिता ने दवाओं का इंतजाम करने की हर संभव कोशिश की। हरिपुरधार क्षेत्र के डसाकना गांव के रहने वाला परिवार में जिगर के टुकड़े के बिछड़ने की मायूसी है।
सोचिए, उस मां-बाप की हालत क्या होगी, जिनका लाडला बेटा दुनिया से रूखसत हो रहा हो। ऐसे में भी माता-पिता की सोच को सेल्यूट करना होगा, जिन्होंने खुद ही बेटे के अंगदान करने की पेशकश की।
पिता संजीव राणा ने एमबीएम न्यूज नेटवर्क से बातचीत में कहा कि चिकित्सकों से बेटे के अंगदान करने की पेशकश की। इस पर उन्हें बताया गया कि शरीर के अंगों को दान नहीं किया जा सकता, क्योंकि अंग इंफेक्शन की वजह से डैमेज हो चुके हैं, लेकिन वह नेत्रदान कर सकता है।
पिता ने कहा कि वो तुरंत तैयार हो गए, लेकिन चिकित्सकों ने बच्चे की मां की भी सहमति मांगी। तनिक भर भी बगैर सोचे मनीषा राणा ने भी नन्हीं जान की आंखों को दान करने का निर्णय ले लिया।
गौरतलब है कि देवांश चौथी कक्षा का छात्र था। छोटा भाई सूर्यांश भी धीरे-धीरे समझ जाएगा कि उसका भाई अब वापस नहीं लौटेगा। परिवार नहीं जानता कि देवांश की आंखों से कौन संसार को देखेगा, लेकिन इतना जरूर पता है कि 9 साल तक जिस मासूम की चुलबुलाहट से पूरा घर गूंजता था, उसकी आंखें किसी अनजान की दुनिया में रोशनी बिखेंरेगी।
गौरतलब है कि सड़क हादसे में सोलन व कांगड़ा के दो बच्चों को पीजीआई में ही ब्रेन डैड घोषित किया गया था। उनके परिवार ने मासूम बच्चों के तमाम अंगों को दान करने का फैसला लेकर पुण्य कमाया था।
