
शिमला – जसपाल ठाकुर
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में गैर शिक्षक कर्मचारियों के विभिन्न संगठनों के चुने हुए पदाधिकारियों के महासंघ JCC पिछले तीन सप्ताह से आंदोलनरत है।
जिसके निरंतरता में आज दिनांक 10.03.2022 को भी JCC के आव्हान पर जेसीसी पदाधिकारियों ने राजेश ठाकुर की अध्यक्षता में तेज राम शर्मा, सुनील दत्त शर्मा, नरेश कुमार शर्मा, अंजना शर्मा, ललित कुमार, धर्म दास, देवेंदर कुमार, हेम राज भाटिया, रवि कान्त चौहान, मोहन लाल शर्मा, तिलक राज, राज कुमारी, राम लाल, तथा अन्य चुने हुए पदाधिकारियों द्वारा विश्वविद्यालय में क्रमिक धरना जारी रहा।
आज यह धरना प्रदर्शन 21वे दिन में प्रवेश कर गया है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन अभी तक चुपी साधे हुए है तथा कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए गठित शिकायत निवारण समिति की बैठक की विधि भी निर्धारित नहीं की गई है। जिसके चलते दिन प्रतिदिन समस्त कर्मचारी समुदाय में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
आज के क्रमिक धरने के उपरांत JCC पदाधिकारियों एवं पूर्व में रहे कर्मचारी नेताओं व सक्रिय भूमिका निभाने वाले कर्मचारियों की बैठक हुई। जिसमे लगभग 100 कर्मचारियों ने भाग लिया तथा आगामी आदोलन हेतु अपने-अपने सुझाव रखे।
बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों का मत था कि अब आंदोलन को ओर उग्र रूप दिया जाएगा। जिसके तहत JCC ने यह फैसला लिया कि धरने को यथावत जारी रखा जाएगा तथा बीच-बीच में महा धरनों का आयोजन भी किया जाएगा।
इसके साथ-साथ दिनांक 15.03.2022 को दोपहर को चेतावनी/ आक्रोश रेली का आयोजन किया जाएगा तथा उसी दौरान आंदोलन की अगली रूप रेखा से कर्मचारी वर्ग को अवगत करवाया जाएगा।
JCC से संबन्धित सभी गैर शिक्षक कर्मचारी संगठनों के मांग पत्र एवं पत्राचारों में मुख्य मांगें
गैर शिक्षक कर्मचारियों के विभिन्न श्रेणियों/वर्गों में स्वीकृत रिक्त पदों को सीधी भर्ती के माध्यम से भरा जाना। पिछले दो वर्षों में निरंतर विज्ञापित केवल कागजो तक ही सीमित रह गया है और चतुर्थ श्रेणी के तो बहुत से पद एसे है कि उन्हें केवल मेरिट के आधार पर ही भरा जाना है लेकिन विश्वविद्यालय कर्मचारी पर अतिरिक्त कार्य बोझ है इसके लिए प्रशासन गंभीर नहीं है।
वहीं एक तरफ तो गैर शिक्षक कर्मचारियों के विभिन्न श्रेणियों/वर्गों में स्वीकृत रिक्त पदों को सीधी भर्ती के माध्यम से भरे जाने के लिए पदों को विज्ञापित किया गया है। वहीं दूसरी तरफ से आउट सोर्स के माध्यम से बंदर बॉट चली हुई है। जिसका हम लिखित रूप से अंकुश लगाने की गुहार प्रशासन करते आ रहे है।
वर्ष 2019 के उपरांत आवास आवंटन समिति की बैठक ना करवाकर प्रशासन अपनी मर्जी से ही अपने चहेतो को आवास आवंटित करता आ रहा है। जिसके कारण पात्र कर्मचारियों को आवास से वंचित होना पड़ रहा है और अभी भी लगभग 10 गैर शिक्षक कर्मचारियों के आवास खाली पड़े हुए है। जिसका वित्तीय नुकसान भी विश्वविद्यालय को हो रहा है। पात्रता रखने वाले कर्मचारियों को आवास आवंटन न होने कारण रोष व्यापत है।
ERP प्रणाली करने के लिए हमने बार-बार प्रशासन को लिखित रूप से अवगत करवाया है लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।
चुने हुए प्रतिनिधियों को कर्मचारियों की मांग एवं भावनाओं को मध्यनजर रखते हुए प्रशासन की लिखित रूप में पत्र दिया। जिसमें इन कर्मचारियों को विश्वविद्यालय परिसर में तैनाती की जाये।
जेसीसी द्वारा विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की जाती है कि प्रदेश सरकार द्वारा विश्वविद्यालय के लिए सहायता अनुदान की राशि में केवल 5% की बढ़ौतरी की गई है जो कि न के बराबर है। क्योंकि प्रदेश सरकार अधिसूचित छठे वेतन आयोग को विश्वविद्यालय में लागू करने के लिए सहायता अनुदान में बढ़ौतरी की अत्यधिक आवश्यकता है ।
इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा प्रदेश सरकार से सहायता अनुदान की राशि को बढ़ाने हेतु मामला उठाया जाये। उन्होंने विश्वविद्यालय शिक्षक वर्ग से भी आवाहन किया है कि सहायता अनुदान को बढ़ाने हेतु विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष रखें।
JCC की यह मांग है कि जल्द से जल्द कर्मचारी शिकायत निवारण समिति की बैठक कारवाई जाये और उसमें लिए जाने वाले फैसलों को लागू करें।
धन्यवाद सहित
Rajesh Thakur
Chairman, JCC, HPU, Shimla
