
चम्बा- भूषण गुरुंग
मेडिकल कालेज चंबा अपनी अव्यवस्था के कारण फिर से सुर्खियों में है। यहां पर अल्ट्रासाउंड के लिए तारीख पर तारीख मिल रही है। पांगी, भरमौर, तीसा, सलूणी और होली से मेडिकल कालेज चंबा आने वाली महिलाओं को अल्ट्रासाउंड करवाना काफी महंगा साबित हो रहा है। जैसे-तैसे कर मेडिकल कालेज चंबा पहुंचने पर उन्हें अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए तारीख पर तारीख मिल रही है। उधर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी स्थिति अनुसार ही अल्ट्रासाउंड की तारीख देने की बात कह रहे हैं।
चंबा, डलहौजी, भटियात, चुराह और भरमौर-पांगी विधानसभा क्षेत्रों की सवा छह लाख की आबादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए मेडिकल कालेज चंबा पर ही निर्भर है। मेडिकल कालेज चंबा के अलावा भरमौर, पांगी, तीसा, सलूणी और भटियात में सिविल अस्पताल हैं। किहार में नागरिक अस्पताल है। इसके अलावा जिले में दर्जनों प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं।
इन सिविल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में गर्भवती महिलाओं को पेट दर्द और पत्थरी के मरीजों को जांच के लिए पहुंचने पर मेडिकल कालेज चंबा के लिए रेफर कर दिया जाता है। चंबा में अल्ट्रासाउंड के लिए तारीख मिलने पर कमरे किराये पर लेकर निर्धारित तारीख तक का इंतजार करने के लिए उन्हें अतिरिक्त पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
डा. देविद्र कुमार, एमएस मेडिकल कालेज चंबा के बोल
भरमौर, पांगी, चुराह, भटियात और डलहौजी में लाखों रुपये खर्च कर अल्ट्रासाउंड मशीनें तो अस्पतालों में स्थापित कर दी गई हैं लेकिन रेडियोलास्टि के पद खाली होने से ये मशीनें धूल फांक रही हैं। लोगों को मेडिकल कालेज में अल्ट्रासाउंड के लिए 270 रुपये चुकाने पड़ते हैं। निजी क्लीनिकों में प्रति अल्ट्रासाउंड 800 रुपये वसूले जाते हैं। ऐसे में 50 से लेकर 170 किलोमीटर का सफर तय कर पहुंचने वाली गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों को अल्ट्रासाउंड करवाना महंगा साबित हो रहा है।
मरीजों की स्थिति अनुसार ही उन्हें अल्ट्रासाउंड की तारीख दी जाती है। आपातकालीन स्थिति में मरीजों के तुरंत अल्ट्रासाउंड करवाने की व्यवस्था है। लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिले, इसकी पूरी कोशिश की जा रही है।
