
कुल्लू- मनदीप सिंह
जिला कुल्लू की लग घाटी के कालांग गांव की दो विधवा महिलाओं को कार सेवा दल संस्था ने जरूरत का सामान दिया। जानकारी के लिए बता दे कि इन में से एक कौशल्या देवी कालंग गांव की रहने वाली है। कौशल्या देवी के पति की 9 साल पहले मृत्यु हो गई है ।कौशल्या देवी की चार बेटियां है 3 दिव्यांग है और एक ठीक है । परिवार में सास ससुर भी है । जो कौशल्या देवी से अलग रहते हैं ।
कौशल्या देवी अपनी चारों बेटियों के साथ एक खोखे में रहती थी । कालग गांव के प्रधान द्वारा कौशल्या देवी के सास _ससुर को समझाया गया और कौशल्या देवी को रहने के लिए एक कमरा दिया जाए। जिसपर अमल करते हुए सास ससुर ने एक कमरा कौशल्या देवी और उनकी चार बेटियों को रहने के लिए दिया, परंतु मकान की छत कच्ची होने के कारण वर्षा का पानी कमरे में आता है । जिससे कमरे में रखा हुआ सामान खराब हो रहा है और कौशल्या देवी और उनकी बेटियों को रहने में मुश्किल हो रही है।
ऐसे में कौशल्या देवी कार सेवा दल कुल्लू ऑफिस में पहुंची और अपनी समस्या के बारे में बताया और संस्था से मदद मांगी की उसे ऊपर मंजिल में कमरा बनाने के लिए सरिया, सीमेंट, बजरी ,रेता की आवश्यकता है और कौशल्या देवी संस्था से सभी समान के लिए मदद चाहती है।
वहीं दूसरी औरत हीरा बतू कालैंग गांव की रहने वाली है। हीरा बतू के पति की आज से 9 साल पहले भालू के मारने से मृत्यु हुई है। हीरा बतू के दो बच्चे हैं एक बेटा एक बेटी हीराबतू के परिवार में सास और एक देवर परिवार के साथ रहते हैं। हीराबतू को सास द्वारा रहने के लिए एक कमरा दिया गया है। जिसकी छत स्लेट की बनी है और अब सलेट टूट जाने के कारण वर्षा का पानी कमरे के अंदर आता है जिससे कमरे में पड़ा सामान खराब हो रहा है। और उन्हें कमरे में रहने के लिए मुश्किल हो रही है ।
हीराबतू मजदूरी का काम करती है और विधवा पेंशन द्वारा अपना व अपने बच्चों का पालन पोषण कर रही है । हीराबतू कार सेवा दल कुल्लू के ऑफिस में पहुंची और संस्था द्वारा मदद मांगी की कमरे में छत डालने के लिए उन्हें 15 चादरे दी जाए ताकि हीरा बातों के कमरे की छत ठीक हो सके ।
दोनों विधवा और महिलाओं द्वारा अपने गांव के प्रधान द्वारा एक प्रार्थना पत्र लाया गया । जिसमें उन्होंने संस्था से मदद मांगी की । जिसको देखते हुए कार सेवा दल के आजीवन सदस्य इंदर राज चावला, अमित शर्मा, नरेंद्र शर्मा, जसवीर चावला की मौजूदगी में दोनों परिवारों को सीमेंट और छत के लिए लोहे की चादर दी गई। जिससे वो अपने माकन का काम करवा सके।
