हिमाचल में पहली बार कोरोना से बचाव को लगाया मोनो क्लोनल एंटीबाडी इंजेक्शन

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कोरोना संक्रमित मरीजों का इस इंजेक्शन से भी उपचार शुरू हो गया है। आईजीएमसी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रजनीश पठानिया ने पहला मोनो क्लोनल इंजेक्शन लगाने की पुष्टि की है।

शिमला, जसपाल ठाकुर

 

हिमाचल में पहली बार कोरोना से बचाव के लिए मोनो क्लोनल एंटीबॉडी इंजेक्शन लगाया गया है। शुक्रवार शाम को आईजीएमसी में उपनिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. रमेश चंद ने यह इंजेक्शन लगवाया। उन्हें कुछ घंटों तक डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। डॉ. रमेश तीन दिन पहले ही कोरोना संक्रमित हुए है। इसके बाद से वह होम आइसोलेशन में हैं।

 

अमेरिका से 211 मोनो क्लोनल एंटीबॉडी इंजेक्शन दान किए गए हैं। इनकी कीमत ढाई करोड़ के करीब है। कोरोना संक्रमित मरीजों का इस इंजेक्शन से भी उपचार शुरू हो गया है। आईजीएमसी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रजनीश पठानिया ने पहला मोनो क्लोनल इंजेक्शन लगाने की पुष्टि की है।

 

बीते वर्ष अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कोरोना पॉजिटिव आने पर उन्हें यह इंजेक्शन दिया था। बताया जा रहा है कि मोनो क्लोनल एंटीबाडी थेरेपी (इंजेक्शन) कोरोना पॉजिटिव मरीज को तब दिया जाता है जब उस मरीज में लक्षण आ रहे हों या फिर बढ़ रहे हों। इसके अलावा अगर मरीज में सांस की दिक्कत है तब भी चिकित्सक इस इंजेक्शन का इस्तेमाल मरीज पर कर सकते हैं।

 

दावा किया जा रहा है कि इससे फेफड़ों में वायरस नहीं फैलता है। वही, रिसर्च में भी सामने आया है कि इसका लाभ मरीजों को मिल सकता है। डॉ रमेश चंद डायबिटीज से भी पीडि़त हैं तो ऐसे में वायरस की चपेट में आने के कुछ दिनों में ही इस इंजेक्शन को लगाने से लाभ मिल सकता है।

 

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