हिमाचल विधानसभा में पंचायती राज संशोधन विधेयक पारित हो गया है। नए प्रावधान के तहत परिवार के अतिक्रमण की स्थिति में बहू के पंचायत चुनाव लड़ने पर भी रोक लग सकती है।
हिमखबर डेस्क
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में तीखी बहस और विपक्ष की कड़ी आपत्तियों के बीच हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (द्वितीय संशोधन) विधेयक-2026 को ध्वनिमतसे पारित कर दिया गया है। इस विधेयक का सबसे चर्चित और विवादित पहलू अतिक्रमण से जुड़ा है।
नए संशोधन के अनुसार यदि किसी परिवार ने सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया है, तो उस घर की बहू को भी पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं होगा। विपक्ष ने इस प्रावधान को पूरी तरह से अलोकतांत्रिक करार दिया है।
जाति मायके से तो अतिक्रमण की सजा बहू को क्यों? : रणधीर शर्मा
सदन में इस बिल पर चर्चा के दौरान भाजपा विधायकों ने सरकार को जमकर घेरा। भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने तर्क देते हुए कहा कि जब किसी भी महिला की जाति उसके माता-पिता (मायके) के आधार पर तय होती है तो ससुराल पक्ष द्वारा किए गए अतिक्रमण की सजा बहू को देना पूरी तरह से गलत और अलोकतांत्रिक है। विधायक त्रिलोक जम्वाल ने भी इस प्रावधान पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज करवाई।
नया संशोधन किसी विशेष महिला को रोकने की साजिश : जयराम ठाकुर
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने इस संशोधन को लेकर सुक्खू सरकार की मंशा पर सीधे सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार पहले पंचायत चुनाव करवाना ही नहीं चाहती थी, लेकिन न्यायालय के फैसले के बाद सरकार को मजबूरन चुनाव की तरफ जाना पड़ा। जयराम ठाकुर ने एक बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार द्वारा लाया गया यह नया संशोधन किसी विशेष महिला को चुनाव लड़ने से रोकने की एक सोची-समझी साजिश है, जिसके लिए नियमों में बदलाव किया गया है।
मंत्री अनिरुद्ध सिंह का पलटवार, कहा- अतिक्रमण के पक्ष में है विपक्ष
विपक्ष के तीखे हमलों का जवाब देते हुए ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के विरोध को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि वे अतिक्रमणकारियों का समर्थन कर रहे हैं।
मंत्री ने सदन में स्पष्ट किया कि यह कोई नया नियम नहीं है। जो प्रावधान और नियम पहले से शहरी निकाय चुनावों में लागू हैं, सरकार ने उसी तर्ज पर समानता लाते हुए पंचायती राज संस्थाओं में भी इसका अनुसरण किया है। उन्होंने विपक्ष के सभी दावों और आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
पंचायती राज संस्थाओं की चुनाव प्रक्रिया के बीच सरकार लाई थी अध्यादेश
गौरतलब है कि राज्य सरकार पंचायती राज संस्थाओं की चुनाव प्रक्रिया जारी रहने के बीच ही इस नियम से संबंधित एक अध्यादेश लेकर आई थी। अब उसी अध्यादेश को स्थायी कानूनी रूप देने के लिए यह संशोधन विधेयक विधानसभा में लाया गया, जिसे बहुमत के आधार पर पारित कर दिया गया है। इस बिल के पास होने से अब पंचायत चुनावों में अतिक्रमणकारियों के परिवारों पर शिकंजा और कस जाएगा।

