हिमाचल के डाक कर्मचारी की बेटी अर्शिता बनी गूगल सॉफ्टवेयर इंजीनियर, मिला 60 लाख का सालाना पैकेज

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हिमख़बर डेस्क 

हिमाचल प्रदेश की एक और बेटी ने अपनी प्रतिभा और कड़ी मेहनत के दम पर सफलता की नई इबारत लिखते हुए पूरे प्रदेश का गौरव बढ़ाया है।

हमीरपुर जिले की भोटा तहसील के छोटे से गांव धबीरी की रहने वाली अर्शिता का चयन दुनिया की अग्रणी टेक कंपनी गूगल में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर हुआ है।

उन्हें कंपनी की ओर से करीब 60 लाख रुपये वार्षिक का आकर्षक पैकेज मिला है। उनकी इस उपलब्धि से न केवल परिवार बल्कि पूरे प्रदेश में खुशी का माहौल है।

अर्शिता एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से संबंध रखती हैं। उनके पिता राजेंद्र देव डाक विभाग में कार्यरत हैं, जबकि माता कल्पना गृहिणी हैं।

सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने बेटी की शिक्षा में कभी कोई कमी नहीं आने दी। अर्शिता ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा भोटा के एक निजी विद्यालय से पूरी की।

इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) हमीरपुर से बीटेक की पढ़ाई की, जहां से उनकी सफलता की मजबूत नींव तैयार हुई।

गूगल जैसी वैश्विक कंपनी तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था। बीटेक के दौरान ही अर्शिता ने सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और कोडिंग की तैयारी शुरू कर दी थी।

उन्होंने लगातार अभ्यास, तकनीकी कौशल और आत्मविश्वास के दम पर गूगल की कठिन चयन प्रक्रिया, ऑनलाइन परीक्षाओं और कई चरणों वाले इंटरव्यू को सफलतापूर्वक पार किया।

अर्शिता की प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गूगल में चयन से पहले उनका चयन प्रतिष्ठित कंपनी जेपी मॉर्गन में भी सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर हो चुका था।

उन्होंने वहां अपनी नई पारी शुरू ही की थी कि मात्र दो महीने के भीतर गूगल से ऑफर मिल गया। बेहतर अवसर और अपने सपनों को साकार करने के उद्देश्य से उन्होंने गूगल का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।

अब अर्शिता गूगल के बेंगलुरु कार्यालय में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में अपनी नई जिम्मेदारियां निभाएंगी।

उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के सहयोग, शिक्षकों के मार्गदर्शन और निरंतर मेहनत को दिया है। उनके अनुसार, सीखने की इच्छा, अनुशासन और लगातार प्रयास ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी हैं।

अर्शिता की यह उपलब्धि हिमाचल प्रदेश के युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत ईमानदारी से की जाए और परिवार का साथ मिले, तो छोटे से गांव से निकलकर भी दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों तक पहुंचा जा सकता है।

उनकी इस उपलब्धि पर क्षेत्रवासियों और शिक्षण संस्थानों ने भी उन्हें शुभकामनाएं देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

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