हिमख़बर डेस्क
हिमाचल प्रदेश का एक प्रशासनिक दंपती आज अपनी मेहनत, संघर्ष और समर्पण के बल पर प्रदेशभर के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
गोपाल चंद शर्मा और नीरजा शर्मा उन चुनिंदा प्रशासनिक अधिकारियों में शामिल हैं, जिन्होंने सीमित संसाधनों से निकलकर हिमाचल प्रशासनिक सेवा (HAS) में अपनी अलग पहचान बनाई।
वर्तमान में गोपाल चंद शर्मा कंडाघाट के एसडीएम हैं, जबकि उनकी पत्नी नीरजा शर्मा ने हाल ही में एसडीएम सोलन का कार्यभार संभाला है।
प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ दोनों अपने परिवार की जिम्मेदारियां भी पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं।
किसान परिवार से प्रशासनिक सेवा तक का सफर
सिरमौर जिले के संगड़ाह उपमंडल के गत्ताधार गांव से संबंध रखने वाले गोपाल चंद शर्मा का बचपन आर्थिक चुनौतियों के बीच बीता। किसान परिवार से आने वाले गोपाल ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया।
उन्होंने नाहन से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक, हाईकोर्ट और अन्य विभागों में सेवाएं दीं, लेकिन उनका सपना प्रशासनिक अधिकारी बनने का था।
वर्ष 2013 में उन्होंने हिमाचल प्रशासनिक सेवा की एलाइड परीक्षा उत्तीर्ण कर आबकारी एवं कराधान अधिकारी (ETO) के रूप में करियर की शुरुआत की।
इसके बाद वर्ष 2022 में पदोन्नति पाकर HAS अधिकारी बने और वर्तमान में एसडीएम कंडाघाट के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
वैज्ञानिक छात्रा से बनीं एसडीएम
बिलासपुर जिले की रहने वाली नीरजा शर्मा ने शूलिनी विश्वविद्यालय से बायोटेक्नोलॉजी में बीएससी और एमएससी की पढ़ाई की। कॉर्पोरेट क्षेत्र में बेहतर अवसर होने के बावजूद उन्होंने प्रशासनिक सेवा को अपना लक्ष्य बनाया।
वर्ष 2013 में तहसीलदार के रूप में नियुक्ति के बाद उन्होंने जिला राजस्व अधिकारी सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। पदोन्नति के बाद अब वे एसडीएम सोलन के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं।
HIPA में हुई मुलाकात, फिर बना जीवनसाथी का रिश्ता
दोनों की पहली मुलाकात HIPA (हिमाचल प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन), शिमला में प्रशिक्षण के दौरान हुई थी।
प्रशिक्षण के दौरान शुरू हुई दोस्ती धीरे-धीरे गहरे विश्वास में बदली और वर्ष 2015 में दोनों विवाह बंधन में बंध गए।
आज यह दंपती प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ अपने दो बच्चों की परवरिश भी पूरी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी से कर रहा है।
माता-पिता के संघर्ष का मिला सुनहरा परिणाम
गोपाल शर्मा के 85 वर्षीय पिता जालम सिंह और माता दुर्गी देवी ने सीमित संसाधनों में अपने बच्चों को शिक्षित करने के लिए अथक संघर्ष किया।
आज उसी मेहनत और संस्कारों का परिणाम है कि उनका बेटा और बहू दोनों हिमाचल प्रशासनिक सेवा में महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए प्रदेश की सेवा कर रहे हैं।
युवाओं के लिए प्रेरणा बनी सफलता की कहानी
गोपाल और नीरजा शर्मा की सफलता इस बात का प्रमाण है कि सपनों को साकार करने के लिए परिस्थितियां नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और निरंतर मेहनत मायने रखती है।
साधारण परिवार से निकलकर प्रशासनिक सेवा के शीर्ष पदों तक पहुंचने वाला यह HAS कपल आज पूरे हिमाचल के युवाओं के लिए संघर्ष, समर्पण और सफलता का जीवंत उदाहरण बन चुका है।

