हिमखबर डेस्क
अब आग बुझाने के लिए बस एक आवाज होगी और सब ठंडा हो जाएगा। यह कोरी कल्पना नहीं बल्कि आधुनिक साइंस और इंजीनियरिंग का सच है। आग पर अब आवाज से ही काबू पाया जा सकेगा।
इस दौरान न पानी की बौछार होगी, न झाग का गुबार और न ही केमिकल का जहरीला धुआं होगा, बस एक खास फ्रीक्वेंसी की ध्वनि तरंगें उत्पन्न होंगी (सोनिक वेव फायर एक्सटिंग्विशर यंत्र) और पल भर में आग की लपटें ठंडी हो जाएंगी।
हिमाचल प्रदेश के सरकारी पॉलिटेक्निक कालेज सुंदरनगर के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के छात्रों ने यह कारनामा कर दिखाया है।
यह भारत का पहला ऐसा कार्यरत प्रोटोटाइप है, जो लोफ्रीक्वेंसी साउंड वेव्स 30 से 60 एचजेएड का इस्तेमाल करके आग बुझाता है। प्रोजेक्ट की लागत सिर्फ सात से आठ हजार रुपए है।
यह पोर्टेबल, पर्यावरण अनुकूल और संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए बिलकुल सुरक्षित है। जंगलों की आग के शुरुआती चरण के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
इन्होंने तैयार किया प्रोजेक्ट
प्रोजेक्ट लीडर राजत सिंह के नेतृत्व में टीम अभिनव, ओंकार, इशांत, राहुल ने यह मेजर प्रोजेक्ट तैयार किया। इसके मेंटर अवनीश पॉल और विभागाध्यक्ष राजेश चौधरी के मार्गदर्शन में छात्रों ने माइक्रोकंट्रोलर, हाई.पावर एम्प्लिफायर और स्पेशल कोडिंग के जरिए यह डिवाइस बनाई गई है।
राजत सिंह के मुताबिक इलेक्ट्रिकल फायर या डेटा सेंटर में पानी या केमिकल इस्तेमाल करने से ज्यादा नुकसान होता है, इसलिए साउंड की ताकत को अजमाकर आग बुझाने का जुगाड़ किया है।
शोध पर टिकाई नजरें
आवाज से आग बुझाने के शोध पर वन विभाग, आईआईटी और विदेशी प्रतिनिधियों ने रुचि दिखाते हुई इस पर नजरें टिकाई हुई हैं। छात्र पेटेंट फाइल करने और ज्यादा ऑटोमेटिक व कॉम्पैक्ट बनाने की तैयारी में हैं।
कालेज इसे स्टार्टअप के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। मेंटर अवनीश पॉल ने कहा कि यह जुगाड़ और आधुनिक इंजीनियरिंग का शानदार मिश्रण है और युवा मस्तिष्क की ताकत को दिखाता है।

