गर्मियों में ‘छीछा’ नहीं खाया तो क्या खाया, लाजवाब है हिमाचल की यह चटनी

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हिमखबर डेस्क

आम का सीजन है और गर्मियां चरम पर हैं। इस मौसम में खाने के लिए भी खट्टी चीजें चाहिए। छाछ, चटनी या आचार। भोजन के साथ इन चीजों को खाने का मन करता है। क्योंकि गर्मियों में अकसर खाना खाने को मन नहीं करता। हर चीज बेस्वाद लगती है।

हां! अगर चटनी हो तो निवाला मुंह में आसानी से चला जाता है। चूंकि आम का सीजन है, तो कच्चे आम की चटनी आसानी से बनाई जा सकती है और वह भी स्वादिष्ट। आम की चटनी को आप चपाती के साथ बिना सब्जी के भी खा सकते हैं।

हिमाचल में आम की चटनी काफी फेमस है, जिसे कांगड़ा-मंडी, कुल्लू, हमीरपुर, बिलासुपर जिला में ‘छीछा’, छछा या छाछा भी कहा जाता है। आम का छीछा बेहद लजीज होता है और पहाड़ के लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं। अगर आप भी कच्चे आम की चटनी (छीछा) बनाना चाहते हैं, तो इसकी रेसिपी बेहद आसान है।

‘छीछा’ बनाने के रेसिपी

  • छीछा बनाने के लिए सबसे पहले चार-पांच कच्चे आम लें और इसके छिलके निकाल दें।
  • फिर आम के छोटे-छोटे टुकड़े करें और इमसें हरा धनिया व हरी मिर्च डालें।
  • फिर इसके मिक्सर ग्राइंडर में अच्छी तरह पीसें।
  • पिस जाने के बाद इसमें अदरक और लहुसन स्वादानुसार डालें।
  • चटनी की खटास कम करने के लिए थोड़ी सी चीनी मिलाएं, इससे चटनी का स्वाद बेहद लाजवाब हो जाएगा।
  • जरा सी मात्रा में डाली गई चीनी खट्टे और तीखे स्वाद को बैलेंस करती है और खट्टा-मीठा स्वाद भी आता है।

वर्षों पुराना है छीछा का स्वाद

हिमाचल में छीछा बनाने की परंपरा बरसों से चली आ रही है। कहते हैं कि जब घरों में सब्जी आदि नहीं होती थी, तो बुजुर्ग आम का छीछा बनाकर रोटी के साथ पेट भर लेते थे। हालांकि शहरों में इसकी जगह टोमेटो सॉस या केमिकल से बनीं दूसरी चटनियों ने ले ली है।

लेकिन हिमाचल के गांवों में आज भी आम का छीछा बेहद पसंद किया जाता है और हफ्ते में 2-3 बार छीछा जरूर बनता है। आम का छीछा पूरी तरह नैचुरल है और किसी को खराब भी नहीं लगता।

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