ज्वाली – अनिल छांगू
पौंग झील से दो माह का मत्स्य आखेट हटते ही रौनक आ गई तथा मछुआरों की किश्तियों से झील गुलजार हो गई। सुबह मत्स्य एकत्रीकरण केंद्रों में मछली पहुंच गई तथा मछली खाने के शौकीन भी मत्स्य एकत्रीकरण केंद्रों पर मछली खरीदने के लिए पहुंच गए। मत्स्य एकत्रीकरण केंद्रों में राहु, कतला, सिंगाड़ा प्रजाति की मछलियां पहुंची।
बता दे कि पौंग झील में तीन हजार मछुआरे हैं जोकि मछली पकडऩे का कार्य करते हैं। कुछ मछुआरों के जालों में तो खूब मछली फंसी, जबकि कुछ मछुआरे खाली हाथ ही वापस आ गए। अब पठानकोट, तलवाड़ा, दिल्ली की मछली मंडियों में पौंग झील की मछली पहुंच जाएगी। इन मछली मंडियों में पौंग झील की मछली की ज्यादा डिमांड रहती है।
दो महीने का बैन हटते ही झील की ओर दौड़े मछुआरे, मत्स्य सहकारी सभाओं में लगे मछली के ढेर
प्रदेश में सभी नदी नालों व झीलों में मछली पकडऩे पर लगा प्रतिबंध 15 अगस्त देर शाम को समाप्त हो गया। इस दौरान शुक्रवार सुबह से ही पौंग डैम की विभिन्न मत्स्य सहकारी सभाओं में मछली बेचने के लिए शिकारियों का पहुंचना शुरू हो गया। हरिपुर सोसाइटी के मत्स्य अवतारण केंद्र में मछली बेचने के लिए शिकारियों की लंबी लाइन देखी गई।
इस दौरान सभा के प्रांगण में चारों तरफ मछलियों के ढेर लग गए। इस दौरान शिकारियों में सबसे अधिक व सबसे बड़ी मछली पकडऩे की होड़ देखी गई । बहरहाल दो माह के अंतराल के बाद मछली के शौकीन लोग अब पुन: मछली का स्वाद ले सकते हैं।

