वाटर सेस पर नहीं मिली फौरी राहत, बिजली कंपनियों को नोटिस जारी

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शिमला – नितिश पठानियां

हिमाचल हाई कोर्ट से असंवैधानिक करार दिए जा चुके वाटर सेस पर राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट में भी फौरी राहत यानी स्टे नहीं मिला है। शुक्रवार को यह मामला सुनवाई के लिए लगा और कोर्ट ने राज्य सरकार की कुल चार याचिकाओं के आधार पर दूसरे पक्ष को नोटिस जारी किए हैं।

अब सुप्रीम कोर्ट में गर्मियों की छुट्टियां हैं और दो जुलाई से कामकाज शुरू होगा। इसके बाद ही इस मामले की सुनवाई होगी। इससे पहले हिमाचल हाई कोर्ट राज्य सरकार की ओर से लगाए गए वाटर सेस को असंवैधानिक करार दे चुका है और इसे बचाने के लिए राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची है।

जलशक्ति विभाग की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी रजिस्टर करवा दी गई थी, जिस पर सुनवाई शुक्रवार को हुई। राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में पैरवी के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल को लाई है। हिमाचल हाई कोर्ट के फैसले पर रोक जरूरी है, ताकि वाटर सेस की वसूली बहाल हो सके। गौरतलब है कि हिमाचल की कांग्रेस सरकार ने वाटर सेस के माध्यम से 3829 करोड़ कमाने का लक्ष्य रखा था।

अभी खाते में 37 करोड़ ही आए थे कि बिजली कंपनियों के हिमाचल हाई कोर्ट जाने के बाद कोर्ट ने इसे संवैधानिक करार देते हुए खारिज कर दिया। कुल 39 बिजली कंपनियों ने हिमाचल हाई कोर्ट का रुख किया था। इन 39 बिजली कंपनियों को अब चार याचिकाओं में बांट दिया गया है। यानी राज्य सरकार की तरफ से चार एसएलपी दायर हुई हैं।

हिमाचल हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान एनएचपीसी की तरफ से सीनियर एडवोकेट तुषार मेहता और जेएसडब्ल्यू की तरफ से सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी राज्य सरकार के खिलाफ पैरवी कर चुके हैं। मुकुल रोहतगी ी इन कंपनियों में से एक के लिए पहले पेश हो चुके हैं। इसलिए सुप्रीम कोर्ट में उन्हें भी नहीं लिया जा सका।

172 बिजली परियोजनाओं पर लगना था वाटर सेस

हिमाचल सरकार द्वारा लगाया गया वाटर सेस कुल 172 बिजली परियोजनाओं पर लागू होना था। इनमें से 24 बड़ी बिजली कंपनियां हैं। अब तक जलशक्ति विभाग के पास कुल 37 करोड़ वाटर सेस के इक_े हुए थे और इनमें से भी अधिकांश पैसा सरकारी बिजली प्रोजेक्टों का है, जो बिजली बोर्ड या ऊर्जा निगम इत्यादि के पास हैं।

कांग्रेस सरकार ने प्रदेश के संसाधन बढ़ाने के नाम पर यह फैसला लिया था, लेकिन सरकार को पांच मार्च, 2024 को हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा था।

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