पठानकोट -जोगिन्दरनगर रेलवे माँर्ग पर पूल का कार्य जोरों पर

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मार्च 2024 तक कार्य पूरा करने का लक्ष्य, 68 करोड़ का बजट पास

व्यूरो रिपोर्ट

काँगड़ा घाटी रेलवे लाइन 2022 में बरसात के मौसम में चक्की पुल के गिरने से घाटी से रेलवे का कनेक्शन टूट चुका है। जिससे पिछले एक साल से रेलगाड़ियां पठानकोट तक नहीं पहुंच पाई। पंजाब को देवभूमि हिमाचल के साथ जोड़ने वाले चक्की पुल का कार्य इन दिनों ज़ोरोंशोरों से चला हुआ है।

मार्च 2024 तक इस पुल के कार्य को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। लेकिन रेलगाड़ियों के बन्द होने के कारण पर्यटन पर भी असर पड़ा है तो वहीं हिमाचल के जिला कांगड़ा की जनता को आवागमन करने में परेशानी हो रही है।

बाहरी राज्यों से अधिकतर पर्यटक, श्रद्धालु रेलगाड़ियों के माध्यम से ही देवभूमि हिमाचल में घूमने आते हैं क्योंकि सभी धार्मिक स्थलों को रेलमार्ग ही आपस में जोड़ता है। रेलगाड़ियों के बन्द होने से लोगों को बसों में मजबूरन महंगा किराया देकर आवागमन करना पड़ रहा है।

रेलगाड़ियां बन्द होने से रेलवे स्टेशनों पर टी-स्टाल लगाने वाले व आसपास दुकानें करने वाले दुकानदारों का धंधा चौपट हो गया है। रेलवे स्टेशनों पर बिरानी छाई हुई है। हालांकि कुछ माह पूर्व रेलवे विभाग ने नूरपुर रोड रेलवे स्टेशन पर जंक्शन बनाकर बैजनाथ तक दो रेलगाड़ियों की आवाजाही शुरू की गई थी लेकिन बरसात में रानीताल के नजदीक ल्हासा गिरने के कारण इनको भी बन्द कर दिया गया।

इस रेलमार्ग पर सात रेलगाड़ियां पठानकोट से जोगिंद्रनगर तक तथा सात रेलगाड़ियां जोगिंद्रनगर से पठानकोट तक चलती हैं। अब लोग चक्की पुल का निर्माणकार्य पूरा होने की राह देख रहे हैं कि आखिरकार कब चक्की पुल बनेगा और कब रेलगाड़ियां सुचारू रूप से चलेंगी।

क्या कहते हैं डिप्टी चीफ इंजीनियर अभिनव गर्ग

इस बारे में डिप्टी चीफ इंजीनियर जालंधर अभिनव गर्ग से बात हुई तो उन्होंने बताया कि चक्की रेलवे ब्रिज का कार्य चला हुआ है जिसमे 76 मीटर के 7 स्पेन डाले जाने है जिसके लिए 68 करोड़ का बजट पास हो गया है। मार्च महीने तक कार्य को पूरा करवा कर कांगड़ा घाटी में रेलवे को बहाल कर दिया जाएगा।

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