इंडिया-न्यूजीलैंड मैच के टिकट ऑफलाइन न मिलने पर स्टेडियम के बाहर युवाओं की नारेबाजी

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व्यूरो रिपोर्ट

भारत-न्यूजीलैंड के धर्मशाला क्रिकेट स्टेडियम में आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप मैच के ऑफलाइन टिकट खरीदने के लिए पहुंचे युवाओं ने स्टेडियम के बाहर जमकर नारेबाजी की। इस दौरान युवाओं ने प्रबंधन पर भी गंभीर आरोप लगाए। करीब 5 घंटों तक युवाओं का जमावड़ा स्टेडियम के मुख्य गेट के पास स्थापित काऊंटर के बाहर लगा रहा।

इतना ही नहीं, युवाओं की भीड़ स्टेडियम के बाहर एकत्रित होने और नारेबाजी के चलते पुलिस जवान भी मौके पर पहुंचे। हालांकि युवाओं द्वारा शांतिपूर्वक ढंग से किए जा रहे प्रदर्शन के चलते पुलिस ने भी किसी प्रकार के बल का प्रयोग नहीं किया।

बता दें कि बुधवार सुबह 8 बजे से ही धर्मशाला में 22 अक्तूबर के भारत-न्यूजीलैंड मैच के ऑफलाइन टिकट खरीदने के लिए क्रिकेट प्रेमियों की भीड़ जुटना आरंभ हो गई थी। युवाओं का कहना था कि उन्हें सूचना मिली थी कि 18 अक्तूबर को इस मैच के ऑफलाइन टिकट स्टेडियम के बाहर स्थित काऊंटर पर बिकना शुरू होंगे, जिसके चलते वे धर्मशाला पहुंचे थे लेकिन काऊंटर पर टिकट बिकना आरंभ नहीं हुए। इस दौरान गुस्साए युवाओं ने एचपीसीए प्रबंधन पर भी गंभीर आरोप लगाए।

युवाओं ने आरोप लगाते हुए कहा कि मैच के टिकट ब्लैक करने के लिए ही इन टिकटों को ऑफलाइन नहीं बेचा जा रहा है। टिकट बेचने वाली कंपनी की मिलीभगत के चलते काऊंटर पर टिकट नहीं बेचे जा रहे हैं। इस दौरान उन्होंने नारेबाजी भी की।

स्टेडियम के मुख्य गेट के समीप स्थित काऊंटर के बाहर युवाओं की भीड़ करीब 5 घंटे इसी आस में जुटी रही कि कभी भी टिकट बिकना शुरू हो सकते हैं लेकिन दोपहर बाद तक टिकट न मिलने पर वे वहां से हट गए।

प्रवासियों पर मजाक पड़ सकता था भारी 

बुधवार को धर्मशाला क्रिकेट स्टेडियम के बाहर युवा टिकट न मिलने और ब्लैक में टिकट बेचने के आरोप लगाते हुए नारेबाजी कर रहे थे। इसी दौरान वहां मौके पर 2 प्रवासी गुजर रहे थे और एक प्रवासी ने भी टिकट खरीदने की बात कही जिस पर उसके साथी दूसरे प्रवासी ने मजाक में ही कह दिया कि 10 हजार में मेरे से खरीद ले।

यह बात वहां खड़े कुछ युवाओं ने सुन ली और दोनों प्रवासियों को दबोचने लगे लेकिन एक प्रवासी मौके से भाग गया। वहीं दूसरे प्रवासी से जब टिकट बारे में पूछा तो उसने कहा कि उसके पास कोई टिकट नहीं है, बस मजाक कर रहे थे। इस दौरान अन्य युवाओं ने स्थिति को संभाला और उस प्रवासी को भी वहां से जाने दिया।

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