दुराना – राजेश कुमार
पूर्व पंचायत समिति सदस्य एवं वर्तमान उपप्रधान पंचायत डोल भटहेड़ साधू राम राणा ने प्रेस वार्ता में कहा कि बरसों से देखने और सुनने में यहीं आ रहा है कि हिमाचल प्रदेश सरकार चाहे किसी भी पार्टी बनें वित्तिय स्थिति का रोना बराबर रोते हुए जानता पर बोझ डाला जाता है.
जबकि समाज सेवा के नाम पंचायतीराज से लेकर विधानसभा तक पहुंचने केलिए हजारों लाखों रुपए चुनावों में खर्च करके चुनकर आए समाजसेवी सरकार के खजाने में जनता के टैक्स के पैसों से वेतन भत्तों एवं पैंशन जैसी सुविधाएं लेकर अपने आप को महान् समाजसेवी समझते हैं।
जबकि असल में वित्तिय स्थिति को कमजोर करने केलिए इन वेतनभोगी नक़ली समाजसेवियों की अहम भूमिका रहती है और प्रताड़ित जनता को होना पड़ता है।
अतः प्रदेश की कमजोर वित्तीय स्थिति को मजबूत करने केलिए तुरंत प्रभाव से हर स्तर के जनप्रतिनिधियों के मानदेय वेतन भत्तों एवं पैंशन जैसी योजनाओं को तब तक केलिए बंद किया जाए. तब तक प्रदेश की वित्तीय स्थिति पूरी तरह से मजबूत नहीं हो जाती है।

