शिमला – नितिश पठानियां
हिमाचल प्रदेश की सुखविंद्र सिंह सुक्खू सरकार ने अफसरशाही पर नकेल कस दी है। सरकार ने दो टूक साफ कर दिया है कि तबादलों के बाद मनपसंद नियुक्तियों के लिए राजनीतिक दबाव बनाने वाले अफसर नपेंगे। सरकार ने आईएएस, एचएएस और हिमाचल प्रदेश सचिवालय सेवाएं अधिकारियों के तबादलों के मामले में यह आदेश जारी किए हैं।
प्रधान सेवाओं के प्रतिनिधि होने के नाते राजनीतिक प्रभाव और दबाव को तबादलों और नियुक्तियों के लिए बनाना कतई सराहनीय नहीं है। यह आचरण नियमों की भी खुली अवहेलना है, जो कि सरकारी सेवा में लगे हुए अधिकारी के लिए सही नहीं है।
मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने सभी प्रशासनिक सचिवों को इस संबंध में एक पत्र जारी किया है। इसे अति महत्वपूर्ण और व्यक्तिगत करार देते हुए मुख्य सचिव ने इसमें लिखा है कि आईएएस, एचएएस और हिमाचल प्रदेश सचिवालय सेवाएं अधिकारियों के तबादले और नियुक्ति व्यापक जनहित में की जाए। इन्हें नियमित अंतराल में किया जाता है।
मुख्य सचिव ने इसमें लिखा है कि इस तरह के उदाहरण कई बार सामने आए हैं कि कुछ आईएएस और हिमाचल प्रदेश सचिवालय सेवा अधिकारी अपने तबादलों और नियुक्तियों के लिए अपने राजनीतिक प्रभाव और दबाव का इस्तेमाल कर रहे हैं।
कुछ अधिकारी अपने स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद मेडिकल ग्राउंड बनाकर छुट्टी पर चले जाते हैं, जिससे कि वे अपनी एडजस्टमेंट के लिए समय जुटा सकें और उपयुक्त स्थान पर अपनी नियुक्ति कर सकें। इस मामले को गंभीरता से देखा गया है, क्योंकि इससे संबंधित विभाग संगठन और पद की कार्यप्रणाली बुरी तरह से प्रभावित हो रही है।
व्यापक जनहित में यह सही नहीं है। इसमें यह भी जोर दिया जाता है कि आईएएस, एचएएस और सचिवालय सेवा अधिकारी राजनीतिक प्रभाव या दबाव से स्थानांतरण और नियुक्तियों को अपने हिसाब से प्रबंधन करने से खुद को रोके और अपने सरकार की तरफ से जारी आदेशानुसार संबंधित स्थानों पर जॉइनिंग दे।
ऐसा नहीं करने पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इन आदेशों को सख्ती से अनुपालन करने को कहा गया है।

