चंबा – भूषण गूरूंग
मेडिकल कॉलेज चंबा में अव्यवस्था का आलम है। अस्पताल की चौथी मंजिल में लाइटें खराब बंद पड़ी हैं। पंखों पर धूल जमा हो गई है।
वार्डों की खिड़कियों के शीशे टूटे पड़े हैं। इससे यहां पर उपचाराधीन मरीज ठीक होने के बजाय और भी बीमार हो सकते हैं।
हैरानी की बात है कि मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की ओर से इन अव्यवस्थाओं को दूर करने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
शहर के समाजसेवी भी समय-समय पर मेडिकल कॉलेज की अव्यवस्था को लेकर आवाज बुलंद करते रहते हैं। बावजूद इसके अभी तक इस दिशा में कोई भी सकारात्मक पहल न हो पाना चिंता का विषय बना हुआ है।
जिले की पौने छह लाख की आबादी स्वास्थ्य लाभ के लिए मेडिकल कॉलेज चंबा पर निर्भर है। बावजूद इसके मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्था इस कद्र हावी है कि मरीजों का मर्ज कम होने के बजाय और बढ़ रहा है।
चतुर्थ तल की बात की जाए तो यहां पर गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों के कमरों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई है। यहां लाइटें खराब पड़ी हैं। पंखों पर धूल जमी रहती है। खिड़कियों के शीशे टूटे हुए हैं। शौचालय गंदगी से अटे पड़े हैं।
चार मंजिला इस भवन में महज एक मात्र स्पेशल वार्ड है। डायलिसिस के कमरे में भी सफाई व्यवस्था पटरी से उतरी हुई है। कुल मिला कर मेडिकल कॉलेज में स्वच्छता के दावों की हवा निकलती साफ दिखाई देती है।
समाज सेवी भूपेंद्र सिंह जंदरोटिया, पीसी ओबराय, शादी लाल शर्मा, किशोर शर्मा, डीके सोनी, सुरेश कश्मीरी, लेखराज आदि ने बताया कि मेडिकल कॉलेज चंबा में पटरी से उतरी सेवाओं को सुचारु करने के लिए प्रबंधन को आगे बढ़ना चाहिए जिससे मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानियों का सामना न करना पड़े। वर्तमान समय में मेडिकल कॉलेज चंबा में हालात बदतर हो चुके हैं।
कार्यवाहक एमएस डॉ. देवेंद्र कुमार ने बताया कि मामला ध्यान में लाया गया है। अस्पताल में खामियों को दूर करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे।

