फतेहपुर में भाजपा के पठानियां और कांग्रेस के पठानियां में है कड़ी टक्कर

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डेढ़ दशक से भाजपा का सूखा खत्म करने के मकसद से मैदान में उतरे राकेश पठानिया।

फतेहपुर – अनिल शर्मा

कांगड़ा की हॉटसीट बनी हुई फतेहपुर विधानसभा में इस समय कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टियों के प्रत्याशियों में कड़ी टक्कर देखी जा रही है। एक तरफ जहां मौजूदा विधायक भवानी सिंह पठानिया के सामने अपने स्वर्गीय पिता और पूर्व मंत्री सुजान सिंह पठानिया की विरासत को सहेजने की चुनौती है,

वहीं दूसरी तरफ भाजपा से प्रत्याशी फतेहपुर के साथ लगती नूरपुर विधानसभा के मौजूदा विधायक एवं जयराम सरकार में निवर्तमान मंत्री राकेश पठानिया पर फतेहपुर को फतेह कर यहां भाजपा के सूखे को खत्म करने की जिम्मेदारी है। इसके साथ ही आम आदमी पार्टी से डा. राजन शुशांत एवं निर्दलीय प्रत्याशी कृपाल परमार प्रमुख रूप से फतेहपुर के चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे हैं।

अब जैसे जैसे चुनाव नजदीक होता जा रहा, मुक़ाबला सिर्फ भाजपा एवं कांग्रेस के बीच सिमटता जा रहा है। एक तरफ भाजपा के उम्मीदवार राकेश पठानिया जहां लगातार हर दिन 15 से 18 सभाएं कर रुख अपने पक्ष में करने के लिए अपने सभी साथियों के साथ कड़ी मेहनत कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ उप चुनाव जीत कर दूसरी बार कांग्रेस से प्रत्याशी बने भवानी पठानिया भी अपने तरीके से चुनावी माहौल अपने पक्ष में करने की कोशिश में हैं।

राकेश पठानिया एक कद्दावर नेता हैं, नूरपुर के तीन बार के विधायक रह चुके हैं और पिछले 28 सालों से राजनीति में हैं। विधानसभा में भी वो अक्सर मजबूती से अपनी बात रखते हुए दिखते रहे हैं।

कांग्रेस प्रत्याशी भवानी सिंह पठानिया अभी राजनीति में नए हैं उन्हें राजनीति में ठीक से 1 वर्ष भी नहीं बीता है। दरअसल भवानी सिंह पठानिया अपने पिता एवं कांग्रेस के बड़े नेता सुजान सिंह पठानिया के निधन के बाद हुए उपचुनाव में जीत दर्ज कर विधायक बने थे।

विकास कार्यों की बात की जाए तो राकेश पठानिया ने नूरपुर में काफी विकास कार्य करवाए हैं जिसमें सड़क, पुल, पानी टैंक, खेल स्टेडियम, मातृ-शिशु अस्पताल आदि प्रमुख रूप से हैं लेकिन नूरपुर को पुलिस जिला बनवाकर उन्होनें अपनी एक अलग छवि बना ली है। वहीं दूसरी तरफ भले ही भवानी सिंह पठानिया कुछ खास काम न करवा पाएं हों लेकिन उनकी सादगी की सराहना करने वाले लोगों की कमी नहीं है।

इसमें कोई दो राय नहीं है कि फतेहपुर के कई इंटीरियर इलाकों में आज भी लोग पानी और मोटरेबल सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। पावर कट की समस्या काफी भी आम है। फतेहपुर में इसबार बदलाव का नारा लेकर चुनाव में उतरे राकेश पठानिया इन सभी मुद्दों को अच्छे से भुना रहे हैं और इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए भाजपा को वोट देने की अपील कर रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों की माने तो राकेश पठानिया के उम्मीदवार घोषित होने से पहले फतेहपुर में भाजपा के समक्ष गुटबाजी से निपटने के कोई साधन नहीं थे। पिछले 17 सालों से फतेहपुर में भाजपा की लगातार हार के पीछे कहीं न कहीं आंतरिक गुटबंदी एक बड़ी वजह थी क्योंकि भाजपा वोट बैंक कई हिस्सों में बट जाता था। इस बार भाजपा ने फायर ब्रांड लीडर कैबिनेट मंत्री राकेश पठानिया को यहां से उम्मीदवार घोषित कर भाजपा के वोट बैंक एकजुट कर दिया है। जिसका फायदा निश्चित तौर पर भाजपा को मिलता हुआ प्रतीत हो रहा है।

राकेश पठानिया ने भी बड़ी सूझ बूझ दिखाते हुए, भाजपा फतेहपुर मंडल के सभी प्रमुख चेहरों को अपने साथ कर लिया। मौजूदा समय में पूर्व प्रत्याशी बलदेव ठाकुर, भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष जगदेव ठाकुर, युवा चेहरा एवं भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष पंकज हैप्पी और ओबीसी चेहरे के रूप में भाजपा ओबीसी के प्रदेश अध्यक्ष ओम प्रकाश चौधरी सहित भाजपा के सभी बड़े चेहर राकेश पठानिया के साथ आ गए हैं।

फतेहपुर विधानसभा सीट की बात करें तो कुल वोटर्स की संख्या लगभग 86,388 है जिसमे पुरुष मतदाता 43,642 है वहीं महिला मतदाता करीब 42,746 है। यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता भाजपा के राकेश पठानिया और कांग्रेस के भवानी सिंह पठानिया में से किसके सिर पर जीत का ताज पहनाती है।

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