तीन माह के मासूम को मां की गोद में छोड़ पंचतत्व में विलीन हुआ शहीद कुलभूषण मांटा

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शिमला, 29 अक्तूबर – नितिश पठानियां

आतंकी मुठभेड़ में गोली लगने से शहीद हुआ हिमाचल का बेटा कुलभूषण मांटा पंचतत्व में विलीन हो गया। शनिवार को शहीद कुलभूषण के चचेरे भाई ने मुखाग्नि दी। गौंठ गांव के श्मशान घाट में पूरे सैन्य सम्मान के साथ कुलभूषण का अंतिम संस्कार हुआ।

वहीं शहीद कुलभूषण मांटा की अंतिम यात्रा में हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। इस दौरान कुलभूषण  “मांटा अमर रहे”, “जब तक सूरज चांद रहेगा कुलभूषण तेरा नाम रहेगा”, “भारत माता की जय”, “देखो-देखो कौन आया शेर आया शेर आया”,”वंदे मातरम” के नारे गूंजे।

अंतिम यात्रा के दौरान

जम्मू-कश्मीर के बारामुला जिले में आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ के दौरान शहीद हुए कुलभूषण मांटा की पार्थिव देह देर रात 12 बजे जब गांव पहुंची तो चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया था।

शहीद कुलभूषण की माता दुर्गा देवी, पिता प्रताप सिंह के बेटे के इंतजार में आंसू भी सूख गए थे। पत्नी नीतू को तो मानों विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उनके पति कुलभूषण मांटा अब इस दुनिया में नहीं रहे। पति की शहादत के साथ-साथ नीतू को अपने तीन महीने के बेटे की चिंता सता रही थी।
शहीद कुलभूषण को अंतिम विदाई देती बहनें

वहीं कुलभूषण की तीनों बहने रेखा, रंजना और किरण जिन्होंने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उनकी सुरक्षा के लिए मन्नत मांगी थी, भाई के पार्थिव देह को तिरंगे में लिपटा देख उनका भी रो-रो कर बुरा हाल हो गया था। लोग हजारों की संख्या में इकट्ठा होकर शहीद कुलभूषण को श्रद्धांजलि दे रहे थे।

आपको बता दें कि शिमला जिले के कुपवी तहसील के गौंठ गांव का रहने वाला कुलभूषण आतंकी हमले के दौरान गोली लगने से घायल हो गया था। जिसके बाद कुलभूषण ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
बता दें कि कुलभूषण मांटा राइफलमैन के पद पर तैनात था। 2014 में सेना में भर्ती हुआ था और 26 साल की उम्र में शहीद हो गया।
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