8 वर्षीय अवतार के लिए डाॅक्टर बने तारणहार, अढ़ाई घंटे चले ऑप्रेशन में निकाला जबड़े का ट्यूमर

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ब्यूरो – रिपोर्ट

कुल्लू में सरवरी के किनारे झुग्गी-झोंपड़ी में अपनी दादी और भाई के साथ गरीबी में जिंदगी जी रहे बालक अवतार के लिए मंगलवार का दिन खुशियां लेकर आया। जबड़े में ट्यूमर की बीमारी से जूझ रहे 8 वर्षीय अवतार की मदद के लिए कुल्लू से लेकर हमीरपुर के डाॅक्टरों ने मानवता का परिचय देते हुए उसके नि:शुल्क इलाज का प्रबंध किया।

हमीरपुर के निजी एएस ठाकुर अस्पताल में सर्जन डाॅ. दिव्य मल्होत्रा की अगुवाई में एनैस्थैटिस्ट डाॅ. भावना सहित 6 डाक्टरों की टीम अढ़ाई घंटे तक चले आप्रेशन में अवतार के जबड़े से ट्यूमर निकालने में कामयाब रही।

डाॅ. मल्होत्रा ने बताया कि अवतार अब स्वस्थ है तथा 2-3 दिन के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। उन्होंने बताया कि अगर समय पर बालक के जबड़े से ट्यूमर नहीं निकाला जाता तो उसकी सांस की नली में समस्या आने के साथ ही निचला जबड़ा और चेहरा खराब होने का खतरा था।

अवतार के सफल ऑप्रेशन के बाद उसकी बूढ़ी दादी ने भी राहत की सांस ली है, जिनका अपने पोते की सेहत को लेकर रो-रोकर बुरा हाल था। बुजुर्ग महिला के 8 साल के पोते अवतार को जबड़े की बीमारी का पता चलने के बाद क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में जांच के दौरान दंत चिकित्सा विशेषज्ञ एवं सर्जन डाॅ. मोहेंद्र चंदेल ने बालक की एक्स-रे सहित तमाम टैस्ट करवाए।

इनमें कई टैस्ट बाहरी लैब्स में होने थे, ऐसे में चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. नरेश व डाॅ. मोहेंद्र चंदेल ने निजी क्लीनिकों में नि:शुल्क टैस्ट करवाने का इंतजाम किया। डाॅ. मोहेंद्र चंदेल के आग्रह पर हमीरपुर के एएस ठाकुर अस्पताल के प्रबंधन ने अवतार के आप्रेशन की 70 से 90 हजार रुपए की फीस माफ कर दी। क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के दोनों चिकित्सकों और कार सेवा दल कुल्लू ने दवाओं सहित अन्य खर्च वहन किया है।

पिता बोले-भगवान का रूप हैं डाॅक्टर, आज अनुभव कर लिया

अवतार के पिता व दादी ने अवतार के इलाज में मदद करने वाले सभी डाॅक्टरों का आभार जताया है। अवतार के पिता के अनुसार सुना था कि डाॅक्टर भगवान का रूप होते हैं लेकिन आज प्रत्यक्ष अनुभव भी कर लिया।

बुजुर्ग दादी व भाई संग जर्जर झोंपड़ी में रहता है अवतार

8 साल का अवतार कुल्लू जिला मुख्यालय के सरवरी में स्थित झुग्गी में दादी और 10 साल के भाई के साथ एक जर्जर झोंपड़ी में रहता है। उसकी मां कई साल पूर्व बीमारी के चलते दुनिया से चल बसी जबकि दादी दृष्टिबाधित होने के कारण अकसर बिस्तर में ही रहती है।

उसका पिता फेरी लगाकर परिवार का पालन-पोषण करता है। अचानक अवतार को हुई जबड़े की बीमारी का पता चला तो गरीब परिवार के होश उड़ गए, लेकिन कुल्लू व हमीरपुर के डाक्टर उनके लिए मसीहा बनकर सामने आए और बालक का नि:शुल्क इलाज करवाया।

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