
बकलोह, भूषण गुरुंग
आज बकलोह क्षेत्र के चिलामा गॉव के रहने वाली 19 साल की संदली थापा ने अपने पिता सुनील थापा की मृत्यु के बाद आज सुबह खुद अपने पिता के अर्थी को नगे पॉव कंधा देकर शमसान घाट तक पहुचाने का, और जो भी रस्मै थी वो अदा करने के बाद बिना आशु गिराये अपने पिता के चिता को अग्नि भेट कर के एक मिसाल कायम कि ।
जितने भी शमशान घाट मे लोग थे सभी उस लड़की की हिम्मत की दाव देने लगे । लडकी ने ब्राह्मण से कहा कि वो पूरे 13 दिन तक अपने पिता के लिए क्रिया मे बेटेगी और अपना बेटी होने का फर्ज निभायेगी। 13 वा दिन के बाद अपने माता जी और घर के अन्य सदस्यों के साथ खुद हरिद्वार में जा कर अपने पिता के अस्ति कलस को प्रवाह करेगी ।
कल रात करीव 10 बजे उनके पिता के पिता के लंबी बीमारी के बाद मृत्यु हो गया थी। अपने माता पिता की इकलौती संतान होने के नाते मेने ये निर्णय लिया कि, में खुद अपने पिता की चिता को अग्नि भेट कुरुगी| ये मेरे खुद का निर्णय था। पिता जी ने भी जीते जी मुझे खुद कहा था कि मेरे मरने के बाद में उनका पूरा क्रिया क्रम मे खुद ही करु| जो मैने कर दिखाया। यही मेरी अपने पिता के लिए सच्ची श्रद्धाजली थी।
